चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की। वांग यी ने डार से कहा कि चीन हमेशा की तरह पाकिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने, उसकी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल विकास पथ तलाशने, आतंकवाद का डटकर मुकाबला करने और अंतरराष्ट्रीय-क्षेत्रीय मामलों में बड़ी भूमिका निभाने में दृढ़ता से समर्थन करेगा।
चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान का समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की। इस दौरान वांग यी ने कहा कि पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए चीन हर हाल में साथ है। उन्होंने भारत से स्थायी संघर्ष विराम करने और बातचीत के जरिये मतभेदों को सुलझाने की बात कही।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्री तीन दिवसीय दौरे पर बीजिंग गए हैं। वांग ने डार से कहा कि चीन पाकिस्तान और भारत द्वारा वार्ता के जरिये उनके मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने, व्यापक और स्थायी संघर्ष विराम हासिल करने, मौलिक समाधान तलाशने का स्वागत और समर्थन करता है।
उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम भारत और पाकिस्तान दोनों के मौलिक और दीर्घकालिक हितों के अनुरूप है। साथ ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अनुकूल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपेक्षा भी यही है।
वांग यी ने कहा कि चीन हमेशा की तरह पाकिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने, उसकी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल विकास पथ तलाशने, आतंकवाद का डटकर मुकाबला करने और अंतरराष्ट्रीय-क्षेत्रीय मामलों में बड़ी भूमिका निभाने में दृढ़ता से समर्थन करेगा।
डार ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग (आईडीसीपीसी) के प्रभावशाली मंत्री लियू जियानचाओ से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष से उत्पन्न मुद्दों के अलावा 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के फैसले पर भी चर्चा की।
डार ने वांग को 10 मई को पाकिस्तान और भारत के बीच चार दिनों के सैन्य संघर्ष के बाद सभी सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के बाद की नवीनतम स्थिति और पाकिस्तान के विचारों के बारे में बताया। डार ने कहा कि पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करेगा। साथ ही वह स्थिति को सामान्य बनाने के लिए भारत के साथ बातचीत जारी रखने को तैयार है।
उन्होंने सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को स्थगित करने के भारत के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए महत्वपूर्ण है।