अमेरिका ने हाल ही में प्रशांत महासागर में नौसेना के तीन लड़ाकू विमान वाहक जहाज तैनात किए हैं। उसने बृहस्पतिवार को यह भी कहा कि यह तैनाती विश्व या किसी राजनीतिक घटना के जवाब में नहीं है। लेकिन चीन इस पर बौखला गया है। चीन सरकार के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ में कहा गया है कि दक्षिण चीन सागर में हमारे सैनिकों को खतरा है।
चीनी अखबार ने चीनी नौसेना विशेषज्ञ ली जीई के हवाले से कहा है कि ऐसा करके अमेरिका प्रशांत क्षेत्र समेत पूरी दुनिया के सामने खुद को सबसे ताकतवार बताना चाहता है। वे इतने करीब हैं कि कभी भी दक्षिण चीन सागर में घुस सकते हैं।
चीन के मुताबिक, अमेरिका की यह कार्रवाई उसके द्वीप स्प्रेटली और पैरासेल पर मौजूद सैनिकों के लिए खतरा पैदा करेगी लेेकिन वह इस क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगा। उधर, अमेरिकी नौसेना की प्रवक्ता कमांडर रिएन मॉमसेन ने कहा कि अमेरिकी नौसेना प्रशांत क्षेत्र में हर दिन सक्रिय रहती है।
उन्होंने कहा, प्रशांत महासागर में अपने 11 परमाणु विमान वाहकों में से तीन की तैनाती राजनीतिक घटनाओं के जवाब में नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। ये तीनों एयरक्राफ्ट वाहक जहाज अमेरिका के मशहूर न्यूक्लियर कैरियर स्ट्राइक का हिस्सा हैं।
पिछले 75 साल से नियमित गश्त जारी
अमेरिकी कमांडर रिएन मॉमसेन ने कहा कि पिछले 75 साल से अमेरिकी पोत और जहाज दक्षिण चीन सागर, पूर्व चीन सागर और फिलीपीन सागर के आसपास नियमित गश्त करती है। यह प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने और शांति कायम करने के कई तरीकों में से एक है। माना जा रहा है कि कोरोना वायरस और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल को रोकने के लिए अमेरिका ने यह तैनाती की है।