चीन ने राष्ट्रीय रक्षा कानून संशोधित किया है। इसके जरिए सैन्य निर्णयों का अधिकार राज्य परिषद (चीनी कैबिनेट) से लेकर सैन्य आयोग को सौंप दिए हैं, जिसके मुखिया देश के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं। सेना के इस आयोग को देश-विदेश में मौजूद चीन के सैन्य व नागरिक संसाधन देश के हित में उपयोग करने के अधिकार मिल गया है। यह संशोधन एक जनवरी से लागू हो चुका है।
2027 तक अमेरिका के समकक्ष सैन्य शक्ति बनने की तैयारी में चीन
नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी समिति द्वारा 26 दिसंबर को यह संशोधन पारित हुआ है। चीन की महत्वाकांक्षा है कि वह 2027 तक अमेरिका के समकक्ष आधुनिकतम सैन्य ताकत बने। उसी वर्ष में पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की स्थापना के सौ वर्ष पूरे हो जाएंगे। शंघाई विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र प्रोफेसर चेन डाओयिन के अनुसार, चीनी शासन मानता है कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) का नियंत्रण मुहर और बंदूक दोनों पर होना चाहिए।
राजनीतिक हो या सैन्य, वही सर्वोच्च सत्ता है, इसलिए निर्णय भी उसे ही लेना चाहिए। यह भारत, अमेरिका, जर्मनी या फ्रांस जैसे देशाें से बेहद अलग व्यवस्था है, जहां माना जाता है कि सैन्य ताकत को नागरिक सत्ता के नियंत्रण में रहना चाहिए।
क्या बदलेगा-
1. सैन्य निर्णय सीधे जिनपिंग के हाथ में
सैन्य नीति बनाने और संबंधित निर्णय लेने का अधिकार अब तक चीन की राज्य-परिषद के पास था। परिषद कैबिनेट जैसी है, जिसका नेतृत्व ली केकियांग के पास है। संशोधन के बाद अब यह सभी निर्णय केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) लेगा जो 20 लाख सैनिकों वाली पीएलए का संपूर्ण हाईकमान है। सीएमसी का नेतृत्व शी जिनपिंग के हाथ में है।
2. सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां रक्षा शोध में साथ
नए कानून में सभी सरकार और निजी कंपनियों को नई रक्षा तकनीकों में शोध के लिए आपस में समन्वय करने के लिए कहा गया है। यह समन्वय राष्ट्रीय स्तर पर होगा, जिसमें पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के हथियारों सहित साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स को शामिल किया गया है।
माओ के बाद सबसे ताकतवर नेता
67 साल के जिनपिंग को सीपीसी के संस्थापक माओ जडोंग के बाद पार्टी के इतिहास का सबसे ताकतवर नेता माना जा रहा है। जिनपिंग सीपीसी के महासचिव और सेना के प्रमुख के साथ साथ जीवनभर के लिए चीन के राष्ट्रपति बन चुके हैं। सीएमसी के प्रमुखों में वे एकमात्र गैर सैन्य सदस्य हैं।