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डब्लूएचओ की बैठक में चीन को कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर घेरा जाना संभव

Sun, 17 May 2020 09:13 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

  • डब्लूएचओ की बैठक में चीन से वायरस को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं
  • ताइवान के बैठक में भाग लेने से चीन में गुस्सा
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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विस्तार
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कोविड-19 महामारी के बाद होने जा रही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की पहली बैठक में, चीन को अपने दो सबसे संवेदनशील मुद्दों पर चुनौती मिलने की संभावना है। जिनमें पहला कम्युनिस्ट पार्टी का वायरस से प्रारंभिक निपटान का तरीका और दूसरा ताइवान की बैठक में भागीदारी की स्थिति है।

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सोमवार को डब्लूएचओ के निर्णय लेने वाले निकाय विश्व स्वास्थ्य सभा की जेनेवा में एक वार्षिक बैठक आयोजित होने जा रही है। अमेरिका ने वायरस को लेकर चीन पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। इसमें वायरस का वुहान की लैब में तैयार किए जाने वाले आरोप भी शामिल हैं। 


अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन की जांच की जाए। वहीं, इस सभा में वायरस को लेकर चीन को जांच दायरे में लाने के लिए यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। 
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अमेरिका समर्थित एक गुट ताइवान को समीक्षक के रूप में बैठक में भाग लेने के लिए समर्थन कर रहा है। गौरतलब हो कि चीन से सटे ताइवान ने वायरस को रोकने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, जिसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। 

ताइवान को बैठक में शामिल किए जाने को लेकर बीजिंग आक्रोशित है। चीन ताइवान को अपने प्रांत के रूप में मानता है। माना जा रहा है कि ताइवान के इस बैठक में शामिल होने से सदस्य देशों के साथ उसके औपचारिक और अनौपचारिक राजनयिक संबंधों में मजबूती आएगी।

यह कदम चीन के खिलाफ अमेरिका और उसके सहयोगियों को खड़ा करने वाले व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है। कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन की सत्तावादी व्यवस्था जांच के दायरे में आ गई है। इस वायरस के कारण दुनियाभर में तीन लाख से ज्यादा लोगों ने अब तक अपनी जान गंवाई हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। 

अमेरिका ने डब्लूएचओ की फंडिंग को रोक दिया है। अमेरिका ने दावा किया है कि संस्था चीन का पक्ष लेती रही है। साथ ही वाशिंगटन ने डब्लूएचओ जैसे ही एक अन्य निकाय के गठन का सुझाव दिया है। 

वहीं, अधिकांश विश्लेषकों ने उम्मीद की कि चीन को सभा में भाग लेने वाले लगभग 200 देशों से समर्थन मिलने के आसार है, क्योंकि इन देशों को अपने घरेलू विकास को बढ़ाने के लिए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ अच्छे संबंधों की आवश्यकता है। इसके अलावा डब्लूएचओ को बदलने वाले किसी प्रयास को भी समर्थन मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आती है। 

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