अमेरिका और चीन के संबंधों को सुधारने की शुरू हुई कोशिश का असर दिखने लगा है। अमेरिकी राज्य अलास्का में दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों की बैठक तय होने के सिर्फ एक दिन बाद गुरुवार को चाइना सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन (सीएसआईए) ने एलान किया कि उसने अमेरिकी की टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ एक कार्यदल का गठन किया है। इसका मकसद निर्यात पर नियंत्रण और सप्लाई चेन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संवाद कायम करना है।
सीएसआईए चीन की चिप उद्योग से संबंधित 774 कंपनियों का संघ है। अमेरिकी कंपनियों के साथ कार्यदल का गठन इन अटकलों के बीच हुआ है कि राष्ट्रपति जो बाइडन जल्द चीन की कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दे सकते हैं, ताकि दुनिया में चिप की हुई कमी का हल निकल सके।
जानकारों का कहना है कि अगर बाइडन प्रशासन ने ये कदम उठाया, तो उसका सबसे ज्यादा लाभ हुवावे टेक्नोलॉजीज और शंघाई स्थित सेमीकंडक्टर बनाने मैन्यूफैक्चरिंग इंटरनेशनल कॉरपोरेशन (एसएमआईसी) को होगा। इन अटकलों के कारण एसएमआईसी के शेयरों के भाव में पिछले कुछ दिनों में साढ़े पांच फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है।
सीआईएसए ने कार्यदल बनाने के लिए वाशिंगटन स्थित सेमीकंडक्टर इंस्डस्ट्री एसोसिएशन (एसआईए) से करार किया है। कार्यदल में दोनों पक्षों के दस-दस विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यदल की हर छह महीने पर एक बार बैठक होगी, जिसमें दोनों तरफ से तकनीक क्षेत्र में हुए विकास और चीन और अमेरिका की व्यापार नीतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
हांगकांग स्थित यूबीएस से जुड़े विश्लेषक विलियम देंग ने यहां के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि कार्यदल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के क्षेत्र में चीन और अमेरिका के बीच संवाद बनाए रखने में मददगार हो सकता है। देंग ने कहा- ‘अगर प्रतिबंध जारी रहे, तब भी बेहतर संवाद के जरिए यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सप्लाई चेन में रुकावट ना आए।’
देंग के मुताबिक इस बात की संभावना बहुत कम है कि बाइडन प्रशासन प्रमुख तकनीकों के मामले में चीन पर से प्रतिबंध हटाएगा। वह पहले ही कह चुका है कि चीन को वह अमेरिका मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है और तकनीक प्रतिस्पर्धा का मुख्य क्षेत्र होगा।
इसके बावजूद जानकारों ने कार्यदल के गठन को सकारात्मक घटना माना है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि इसके गठन की घोषणा इस एलान के कुछ ही घंटों के अंदर हुई कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान अलास्का में चीन के विदेश नीति संबंधी वरिष्ठतम अधिकारी यांग जिची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी से 18 और 19 मार्च को मिलेंगे। इस बैठक को 2+2 मीटिंग कहा जा रहा है।
इस बैठक से चीन में उम्मीदें जगी हैं कि पिछले साल जिस तरह का अमेरिका के साथ उसका तनाव बढ़ा, अब उसमें कमी आएगी। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना में अमेरिकी अध्ययन के विशेषज्ञ दियाओ दामिंग ने चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि अगर 2+2 मीटिंग का नतीजा सकारात्मक रहा, तो मुमकिन है कि उससे दोनों देशों के राष्ट्रपतियों की मुलाकात का रास्ता खुले।
रेनमिन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र के एसोसिएट डीन जिन कानरोंग ने कहा है कि साफ तौर पर अलास्का बैठक की जरूरत जितनी चीन को है, उतनी ही अमेरिका को भी है। उन्होंने कहा- ‘इस मामले में बाइडन प्रशासन पिछले प्रशासन की तुलना में बेहतर है कि वह चीन से बातचीत करने को तैयार है। चीन संबंधों को फिर से कायम करने को लेकर गंभीर है। इसलिए अलास्का बैठक का चाहे जो नतीजा हो, लेकिन बातचीत का इरादा स्वागतयोग्य है।’
चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में सीनियर रिसर्च फेलो यांग शियू ने ध्यान दिलाया है कि अलास्का बैठक से पहले एंटनी ब्लिंकेन जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। इसका मतलब है कि अमेरिका अलास्का में होने वाली बातचीत को लेकर अपने सहयोगी देशों को भरोसे में ले रहा है। विश्लेषकों ने इसे बात का संकेत माना है कि अमेरिकी अधिकारी पूरी तैयारी के साथ अलास्का बैठक में जाएंगे।