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राजनाथ सिंह की रणनीति आई काम: चीन ने कहा भारत के साथ सीमा विवाद जटिल, परिसीमन पर बातचीत को तैयार

Mon, 30 Jun 2025 10:38 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

भारत और चीन के रक्षा मंत्री की मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि- भारत-चीन सीमा विवाद जटिल है और इसे सुलझाने में समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन सीमा निर्धारण और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए बातचीत करने को तैयार है।
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भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री डोंग जुन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने और सीमा पर परिसीमन के बारे में मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद जटिल है और इसे सुलझाने में समय लगेगा। चीन सरकार के नियंत्रण वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने वहां विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के हवाले से यह जानकारी दी।

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दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 जून को चीन के रक्षा मंत्री डोंग जून के साथ बैठक में प्रस्ताव दिया था कि दोनों देशों को तय रोडमैप के तहत जटिल मुद्दे हल करना चाहिए। इसमें उन्होंने सीमा पर तनाव कम करने व  सीमांकन के लिए मौजूदा तंत्र को बहाल करने के कदम शामिल करने की बात कही थी।

माओ निंग ने कहा, सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों के लिए बैठक तंत्र स्थापित किया जा चुका है। दोनों देशों में सीमा मुद्दे, सीमांकन और परिसीमन को हल करने के लिए राजनीतिक सिद्धांतों पर समझौता हुआ है। निंग ने कहा, हम सीमा को स्पष्ट करने वाली वार्ता, सीमा प्रबंधन एवं नियंत्रण जैसे मुद्दों व सीमावर्ती इलाकों में शांति व सौहार्द बनाए रखने तथा सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा, सीमा का सवाल जटिल है और इसे सुलझाने में समय लगता है। सकारात्मक यह है कि दोनों देशों ने विभिन्न स्तरों पर कूटनीतिक व सैन्य संचार तंत्र स्थापित कर लिए हैं। हमें उम्मीद है कि भारत चीन के साथ इसी दिशा में काम करेगा।
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भारत का सीमांकन-परिसीमन पर जोर
एससीओ बैठक से इतर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून के साथ 26 जून को बैठक में चीन को सुझाव दिया था कि दोनों देश हर हाल में सीमा पर तनाव कम करने के लिए प्रयास करें। दोनों देशों की सीमा को स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि भविष्य में संघर्ष की स्थिति न बने। इसके लिए सीमांकन व परिसीमन का लक्ष्य जल्द हासिल करना चाहिए।

भारत व चीन के बीच 2020 में गलवां घाटी में खूनी संघर्ष के बाद से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। कोविड के समय दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान बंद हुई थी जो कई दौर की वार्ताओं के बाद अब शुरू होने वाली है। कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष शुरू हो पाई है।

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सार्क की जगह नया क्षेत्रीय समूह बनाना चाहते हैं चीन-पाकिस्तान
चीन भले भारत के साथ विवाद खत्म करने की बात कर रहा हो, लेकिन दक्षिण एशिया में भारत को अलग-थलग करने की पूरी कोशिश भी कर रहा है। इसी के तहत वह पाकिस्तान के साथ मिलकर दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क या दक्षेस) की जगह एक नया क्षेत्रीय संगठन बनाने में जुटा है।

एक राजनयिक के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन व पाकिस्तान के बीच इस संगठन पर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। दोनों आश्वस्त हैं कि क्षेत्रीय हैं एकीकरण के लिए नया संगठन जरूरी है। यह संगठन दक्षेस की जगह ले सकता है। दक्षेस में भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक राजनयिक ने कहा, चीन के शहर कुनमिंग में पाकिस्तान, चीन व बांग्लादेश की हाल में हुई त्रिपक्षीय बैठक इन्हीं कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा थी। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार एम तौहीद हुसैन ने कहा, हम कोई गठबंधन नहीं बना रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत को नए संगठन में आमंत्रित किया जाएगा, जबकि श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान इसका हिस्सा हो सकते हैं।  

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