द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर हो रही भव्य सैन्य परेड में बुधवार को चीन ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। चीनी सेना ने दुनिया को पहली बार अपने जेट लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता से जुड़े कुछ आधुनिक हथियारों से रूबरू कराया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और ईरान, मलेशिया, म्यांमार, मंगोलिया, इंडोनेशिया, जिम्बावे और मध्य एशियाई देशों के नेताओं सहित 26 विदेशी नेताओं ने इसमें भाग लिया।
द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी आक्रमण के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित परेड में सैकड़ों सैनिकों ने भाग लिया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू परेड में भाग ले रहे हैं।
छह साल बाद पहली बड़ी सैन्य परेड
2019 के बाद यह चीन में पहली बड़ी सैन्य परेड है। 2019 में यह परेड सीपीसी की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर आयोजित की गई थी। इस बार की परेड द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति को याद करने के लिए की जा रही है। इस युद्ध ने चीन को बुरी तरह प्रभावित किया था।
चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से अमेरिका चिंतित
इस परेड का मकसद देश के नागरिकों में गर्व और आत्मविश्वास पैदा करना है और यह दिखाना है कि देश किसी भी हमले से निपटने में सक्षम है। हालांकि, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत उसके एशियाई पड़ोसियों और अमेरिका के लिए चिंता का विषय भी बनी हुई है।
अमेरिका और पश्चिम देश परेड से दूर
अमेरिका और पश्चिमी देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस परेड से दूर हैं। जापान, भारत और दक्षिण कोरिया के नेता भी इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं। उत्तर कोरिया के किम जोंग उन छह साल के बाद चीन में इस तरह के आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं। उनके साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति भी शामिल हो रहे हैं। दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों के नेता भी इसमें शामिल हो रहे हैं। हालांकि, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने देश में विरोध प्रदर्शनों के चलते अपनी यात्रा रद्द कर दी है।