पिछले दिनों अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज में एक ईरानी जहाज को रोका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे चीनी उपहार बताया। अब चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति को चेतावनी दे दी है। चीन ने साफ-साफ कहा कि बिना सबूत आरोप स्वीकार नहीं है। खबर में जानिए, क्या है पूरा मामला...
अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक तकरार एक बार फिर चरम पर है। ताजा विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दावे से शुरू हुआ है। दरअसल, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज के पास एक ईरानी जहाज को रोका। दावा किया गया कि इसमें चीन की संलिप्तता हो सकती है। चीन ने इन आरोपों को न केवल सिरे से खारिज कर दिया है, बल्कि अमेरिका को बिना साक्ष्यों के बयानबाजी न करने की सख्त हिदायत भी दी है।
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चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, 'चीन ऐसे किसी भी आरोप या अटकलबाजी को स्वीकार नहीं करता है जिसका कोई तथ्यात्मक आधार न हो। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत देशों के बीच होने वाले सामान्य व्यापारिक संबंधों को इस तरह बाधित करना या उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।'
ट्रंप के 'उपहार' वाले बयान से भड़का विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह इंटरव्यू है, जो उन्होंने पिछले मंगलवार को दिया था। ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक संदिग्ध ईरानी जहाज को बीच रास्ते में ही रोका है। उन्होंने कहा, 'यह शायद चीन की ओर से ईरान को भेजा गया कोई 'उपहार' हो सकता है।' इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध काफी बेहतर हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे लगा था कि हमारे बीच एक साझा समझ बनी हुई है, लेकिन इस घटना ने मुझे थोड़ा हैरान किया है।'
निक्की हेली ने लगाए गंभीर आरोप
ट्रंप के सुर में सुर मिलाते हुए साउथ कैरोलिना की पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने भी इस मामले को हवा दी। 21 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने सनसनीखेज दावा किया। हेली के मुताबिक, होर्मुज में जिस जहाज को पकड़ा गया है, वह सीधे चीन से ईरान जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाज के भीतर मिसाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली घातक रासायनिक सामग्री छिपाई गई थी।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले इस संकरे रास्ते से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव के बीच इस मार्ग पर कोई भी सैन्य गतिविधि वैश्विक बाजार में खलबली मचा सकती है। फिलहाल, चीन और अमेरिका के बीच का यह वाकयुद्ध एक नया मोड़ ले चुका है।