Xi Jinping with Iraqi Prime Minister
- फोटो : GBtimes
चीन का महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। इसके साथ ही चीन ने अब मध्य एशिया और खाड़ी देशों में अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिये हैं। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इराक के प्रधानमंत्री अदल अब्दुल महादी से द्वपक्षीय सहयोग और मध्य एशिया और खाड़ी क्षेत्रों के हालात पर चर्चा की। लेकिन चीन की इस पहल के मायने बीआरआई से जोड़ कर देखा जा रहा हैं।
बेल्ट एंड रोड का दूसरा चरण शुरू
चीन के लिए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का दूसरा चरण बेहद अहम है। इराक पहला देश है जिसने बीआरआई में रूचि दिखाई है। इस परियोजना की परिकल्पना 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। बीआरआई को सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट या 21वीं सदी की सामुद्रिक सिल्क रोड के तौर पर भी जाना जाता है। दुनिया की 70 फीसदी आबादी और 75 फीसदी उपलब्ध संसाधनों से जोड़ने वाली यह योजना चीन को दुनिया के बाकी बाजारों से जोड़ेगी। इसके तहत छह गलियारे बनाए जाने की योजना है।
इराक की भूमिका अहम
इसके एक रूट में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से श्रीलंका और इंडोनेशिया और इराक को जोड़ना है, तो दूसरा रूट चीन से रूस और ईरान होते हुए सीरिया और इराक से जोड़ना है। इस योजना के तहत कई देशों के सड़क संपर्क मार्ग को जोड़ने के साथ बंदरगाहों को भी जोड़ा जाना है। बीआरआई के गलियारे यूरेशिया में प्रमुख रास्तों, चीन-मंगोलिया-रूस, चीन-मध्य एवं पश्चिम एशिया, चीन-भारत-चीन प्रायद्वीप, चीन-पाकिस्तान, बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार से गुजरेंगे।
बीआरआई से सीरिया भी चाहता है जुड़ना
2018 के आंकड़ों के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ कर 3,000 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। चीन हर साल इराक से 2 हजार करोड़ डॉलर का कच्चा तेल खरीदता है, जबकि इराक चीन से हर साल तकरीबन 800 करोड़ का आयात करता है। वहीं इराक के बाद सीरिया दूसरा अरब देश है, जिसने बीआरआई में शामिल होने की दिलचस्पी दिखाई है। सीरिया और इराक दोनों ही देश आईएसआईएस के आतंक को झेल चुके हैं और उन्हें अर्थव्यवस्था में उम्मीद की किरण चीन की तरफ से दिखाई दे रही है। सीरिया का कहना है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को रोकने में बीआरआई अगम भूमिका निभा सकता है।
चीन से संबंध बेहद पुराने
इराक के साथ वार्ता में चीनी राष्ट्रपति ने इराक के साथ द्वपक्षीय रणनीतिक हिस्सेदारी पर जोर देते हुए सहयोग की इच्छा जताई। चीन और इराक ने पिछले साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाई थी। वहीं इस साल पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना के 70 साल पूरे होने की वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। चीन और इराक के बाद 2015 में रणनीतिक साझेदारी वाले संबंध स्थापित हुए थे। वहीं इराक नए चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले अरब देशों में से एक है। वार्ता के दौरान जिनपिंग ने इराक के पुनर्निर्माण के साथ बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को वहां तक पहुंचाने की इच्छा जताते हुए कहा कि दोनों देश पेट्रोलियम और आधारभूत ढांचे एवं अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। जिनपिंग का कहना है कि दोनों प्राचीन सभ्यताओं को सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए सक्रिय रूप से भागीदारी निभानी चाहिए।
चीन को तेल देने वाला दूसरा देश
यह चीन की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि वह पहला ऐसा देश है जिसने इराक की आर्थिक व्यवस्था के पुर्ननिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की पहल की थी। वहीं चीन ने इराक की भौगोलिक हालातों को देखते हुए कई प्रोजेक्ट्स भी लगाए हैं। यहां तक कि जब इराक में आईएसआईएस का कब्जा था और सुरक्षा के लिहाज से हालात बदतर थे, तब भी चीनी कंपनियां वहां डटी रहीं। वहीं इराक चीन को तेल मुहैया कराने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और मध्य पूर्व में चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक हिस्सेदार है।