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ड्रैगन की कूटनीति: ईरान युद्ध में उलझी दुनिया, US से मुकाबले की तैयारी में चीन; पंचवर्षीय योजना को दी मंजूरी

Thu, 12 Mar 2026 03:27 PM IST
Nirmal Kant वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।

सार

चीन की संसद एनपीसी ने पंचवर्षीय योजना को मंजूरी दी है। इस योजना में तकनीक को सबसे आगे रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यही अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच चीन का फोकस कहां है, पढ़िए रिपोर्ट-
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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दुनिया का ध्यान इस समय पश्चिम एशिया में जारी जग पर है। लेकिन इसके बावजूद चीन अपनी योजनाओं और कामों को आगे बढ़ाता जा रहा है। इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है। बीजिंग को युद्ध और उससे ऊर्जा की आपूर्ति व दुनिया की राजनीति पर पड़ने वाले असर की चिंता है। लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण चीन का असली मुकाबला अमेरिका से है। यह मुकाबला नई और आधुनिक तकनीकों के विकास को लेकर है, जो 21वीं सदी को तय करेंगी।
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यह बात उस पांच साल की योजना में भी दिखाई दी, जिसे गुरुवार को चीन की संसद नेशनल पीपल्स कांग्रेस (एनपीसी ने मंजूरी दी। यह चीन का साल का सबसे बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम होता है। इस योजना से स्पष्ट है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को बदलने और तकनीक के क्षेत्र में आगे रहने के लिए और तेजी से काम करना चाहता है। सरकारी मीडिया ने कहा कि चीन का आर्थिक विकास पर टिके रहना अनिश्चित दुनिया में स्थिरता लाने वाली ताकत है।

चीनी मीडिया ने क्या कहा?
सरकारी अखबार पीपुल्स डेली ने बुधवार को पहले पन्ने पर लिखे लेख में कहा कि एक स्थिर और विकासशील चीन बदलाव और उथल-पुथल से भरी दुनिया में अधिक स्थिरता और भरोसा पैदा करता है। दूसरे सरकारी मीडिया ने भी इसी तरह की बात कही। इन लेखों और सरकारी बयानों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम का जिक्र नहीं किया गया है। हालांकि, इनमें कहा गया है कि टैरिफ और वेनेजुएला से लेकर ईरान तक सैन्य ताकत के इस्तेमाल ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संचालित करने वाली वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया है। चीन सार्वजनिक रूप से उस व्यवस्था का बचाव करता है, लेकिन यह भी कहता है कि इसे अधिक न्यायसंगत बनाया जाना चाहिए ताकि इसमें विकसित देशों के साथ-साथ विकासशील देशों के हित भी शामिल हों।
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बीजिंग का दौरा करेंगे ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप तीन हफ्तों के बाद बीजिंग आने वाले हैं। वहां उनकी मुलाकात चीन के नेता शी जिनपिंग से होगी और दोनों के बीच बातचीत होगी। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने अपनी समापन बैठक में तीन कानूनों को मंजूरी दी। इनमें एक कानून जातीय अल्पसंख्यकों से जुड़ा है। 

पंचवर्षीय योजना को मंजूरी देने के लिए जो मतदान होता है, उसे औपचारिक माना जाता है और ये योजनाएं लगभग सर्वसम्मति से पारित होते हैं। इनका मकसद सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के पीछे एकता दिखाना होता है। पांच वर्षीय योजना के पक्ष में 2,758 वोट पड़े, एक विरोध में और दो सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाई। विदेश मंत्री वांग यी ने वार्षिक प्रेस वार्ता में कहा, हम एक महान देश के निर्माण में पूरी गति से आगे बढ़ रहे हैं। 

ये भी पढ़ें: GCC देशों पर ईरानी हमले की निंदा: UN में लाए गए प्रस्ताव पर भारत ने क्या कहा? जॉर्डन और खाड़ी देशों का भी नाम

विकास के लिए तकनीक पर भरोसा
कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन को घरेलू खर्च बढ़ाने के लिए उपभोक्ताओं के हाथ में ज्यादा पैसा देना चाहिए, ताकि निर्यात आधारित विकास पर उसकी निर्भरता कम हो सके। चीन के नेता सैद्धांतिक रूप से इससे सहमत हैं, लेकिन पांच वर्षीय योजना में तकनीक को सबसे आगे रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यही अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि खपत बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले कदम धीरे-धीरे लागू होंगे। सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, जबकि सरकारी धन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और अन्य क्षेत्रों में लगाया जाएगा।

चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग ने कांग्रेस की शुरुआत में 2026 के लिए 4.5% से 5% तक आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखा। यह लक्ष्य थोड़ा कम रखा गया है ताकि सरकार इस साल ज्यादा दबाव में न रहे और पांच साल की योजना के लंबे समय के लक्ष्यों पर ध्यान दे सके।
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जलवायु पर सतर्क रुख
पांच वर्षीय योजना में कुल कार्बन उत्सर्जन (यानी अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले प्रदूषण की मात्रा को घटाना) कम करने का वादा नहीं किया गया है, बल्कि केवल उत्सर्जन की तीव्रता कम करने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि अगर अर्थव्यवस्था बढ़ती है तो कुल उत्सर्जन भी बढ़ सकता है। उत्सर्जन तीव्रता में कमी का लक्ष्य 17% रखा गया है, जिसे लेकर विश्लेषकों का कहना है कि इससे कुल उत्सर्जन 3% या उससे अधिक बढ़ सकता है। 

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