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मुश्किल: चीन में पढ़ने वाले अन्य देशों समेत भारतीय छात्रों के आने पर रोक, दूतावास के हस्तक्षेप से भी नहीं बनी बात

Tue, 23 Mar 2021 12:41 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
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विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
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चीनी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले भारतीय समेत अन्य देशों के छात्रों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। दरअसल चीनी विश्वविद्यालयों में दाखिला ले चुके छात्र कोरोना वायरस के फैलने के बाद अपने-अपने देश लौट आए थे और चीन अब उन्हें वापस आने की अनुमति नहीं दे रहा है। इसके बजाय, बीजिंग ने सुझाव दिया है कि भारतीय छात्र चीन में अपने विश्वविद्यालयों के साथ संपर्क में रहें और उनके निर्देशों का पालन करते हुए वे अपनी ऑनलाइन पढ़ाई को जारी रखें।

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चीन में स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को कहा कि वह उन हजारों भारतीय छात्रों की चिंताओं को लेकर चीनी अधिकारियों के साथ संपर्क में है, जो बीजिंग द्वारा लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों की वजह से भारत में फंस गए हैं और चीन में स्थित विश्वविद्यालयों में वापस नहीं आ पा रहे हैं।
 

चीन के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 196 देशों और क्षेत्रों के 4,92,185 अंतर्राष्ट्रीय छात्र देश में 2018 के अंत तक अध्ययन कर रहे थे। इनमें 23,000 भारतीय विद्यार्थी भी शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर भारी शुल्क देकर चीन के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं।

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चीन में विदेशी छात्रों की संख्या को देखे तो 50,000 से अधिक छात्रों के साथ दक्षिण कोरिया इस सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद थाईलैंड और पाकिस्तान के 28,000 से अधिक छात्र हैं जो चीन में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके बाद 23,000 की संख्या के साथ भारतीय छात्र चौथे सबसे बड़े समूह हैं।

छात्रों का आरोप- छात्रवृति को किया निलंबित
कोविड-19 पाबंदियों का हवाला देकर चीन छात्रों को सलाह दे रहा है कि वे अपने देश से ही ऑनलाइन क्लास लेना जारी रखें। बहरहाल छात्रों का कहना है कि उनमें से अधिकतर विज्ञान के विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं, लिहाजा उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रयोगशाला की जरूरत है। उन्होंने यह भी शिकायत की है कि उनकी छात्रवृत्ति को निलंबित कर दिया गया है।
 

एक प्रेस विज्ञप्ति में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि हम छात्रों की जल्द से जल्द वापसी के विषय को लेकर चीन के शिक्षा मंत्रालय समेत चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं। विज्ञप्ति के मुताबिक, दूतावास दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही के मुद्दे पर प्रगति के लिए चीनी अधिकारियों से संवाद करना जारी रखेगा।

उसमें रेखांकित किया गया है कि चीनी अधिकारियों ने बताया कि वे छात्रों की चिंताओं से अवगत हैं और सभी संबंधित चीनी विश्वविद्यालयों को छात्रों के साथ निकट संपर्क बनाए रखने और उन्हें सूचित करते रहने के लिए कहा गया है। साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं को भी जारी रखने के लिए कहा गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि 'चीनी अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि भारतीय छात्र अपने विश्वविद्यालयों के संपर्क में रहें और विश्वविद्यालयों के सुझावों और मार्गदर्शन के अनुसार अपनी पढ़ाई करें।'

बता दें कि बीजिंग ने कोरोना महामारी के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। कुछ दिन पहले चीन ने कहा था कि जो भी छात्र वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें चीन द्वारा निर्मित कोरोना का टीका लगवाना होगा। नई दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास ने एक नोटिस चस्पा कर बताया था कि चीनी टीका लगवाने के साथ उक्त व्यक्ति के पास टीकाकरण का प्रमाणपत्र भी होना अनिवार्य है।

चीन के फैसले के बाद सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि भारत में चीन द्वारा निर्मित कोई भी टीका नहीं है। चीन के दूतावास ने अभी ये भी स्पष्ट नहीं किया है कि भारत में चीन का टीका नहीं है तो वो कैसे लगेगा?  

रिपोर्ट के अनुसार 23 हजार भारतीय छात्र जिसमें अधिकतर मेडिकल के छात्र और कुछ पेशेवर लोग हैं जो चीन में काम करते हैं। कोरोना महामारी के कारण वह लंबे समय से अपने देश में हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से चीन ने ये फैसला लिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आवागमन को शुरू किया जा सके।

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