चीनी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले भारतीय समेत अन्य देशों के छात्रों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। दरअसल चीनी विश्वविद्यालयों में दाखिला ले चुके छात्र कोरोना वायरस के फैलने के बाद अपने-अपने देश लौट आए थे और चीन अब उन्हें वापस आने की अनुमति नहीं दे रहा है। इसके बजाय, बीजिंग ने सुझाव दिया है कि भारतीय छात्र चीन में अपने विश्वविद्यालयों के साथ संपर्क में रहें और उनके निर्देशों का पालन करते हुए वे अपनी ऑनलाइन पढ़ाई को जारी रखें।
चीन के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 196 देशों और क्षेत्रों के 4,92,185 अंतर्राष्ट्रीय छात्र देश में 2018 के अंत तक अध्ययन कर रहे थे। इनमें 23,000 भारतीय विद्यार्थी भी शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर भारी शुल्क देकर चीन के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं।
एक प्रेस विज्ञप्ति में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि हम छात्रों की जल्द से जल्द वापसी के विषय को लेकर चीन के शिक्षा मंत्रालय समेत चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं। विज्ञप्ति के मुताबिक, दूतावास दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही के मुद्दे पर प्रगति के लिए चीनी अधिकारियों से संवाद करना जारी रखेगा।
उसमें रेखांकित किया गया है कि चीनी अधिकारियों ने बताया कि वे छात्रों की चिंताओं से अवगत हैं और सभी संबंधित चीनी विश्वविद्यालयों को छात्रों के साथ निकट संपर्क बनाए रखने और उन्हें सूचित करते रहने के लिए कहा गया है। साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं को भी जारी रखने के लिए कहा गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि 'चीनी अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि भारतीय छात्र अपने विश्वविद्यालयों के संपर्क में रहें और विश्वविद्यालयों के सुझावों और मार्गदर्शन के अनुसार अपनी पढ़ाई करें।'
बता दें कि बीजिंग ने कोरोना महामारी के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। कुछ दिन पहले चीन ने कहा था कि जो भी छात्र वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें चीन द्वारा निर्मित कोरोना का टीका लगवाना होगा। नई दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास ने एक नोटिस चस्पा कर बताया था कि चीनी टीका लगवाने के साथ उक्त व्यक्ति के पास टीकाकरण का प्रमाणपत्र भी होना अनिवार्य है।
चीन के फैसले के बाद सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि भारत में चीन द्वारा निर्मित कोई भी टीका नहीं है। चीन के दूतावास ने अभी ये भी स्पष्ट नहीं किया है कि भारत में चीन का टीका नहीं है तो वो कैसे लगेगा?
रिपोर्ट के अनुसार 23 हजार भारतीय छात्र जिसमें अधिकतर मेडिकल के छात्र और कुछ पेशेवर लोग हैं जो चीन में काम करते हैं। कोरोना महामारी के कारण वह लंबे समय से अपने देश में हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से चीन ने ये फैसला लिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आवागमन को शुरू किया जा सके।