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चीन सरकार की चिंता: स्कूली बच्चों की नींद में ना पड़े खलल, अभिभावकों को दिए जरूरी निर्देश

Sat, 03 Apr 2021 03:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

बीते दिसंबर में शिक्षा मंत्रालय ने एक अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें कहा गया था कि प्राइमरी स्कूल के बच्चे औसतन साढ़े नौ घंटे और सेकंडरी स्कूल के बच्चे औसतन सिर्फ 8.4 घंटे की नींद ही ले रहे हैं...
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चीन का एक स्कूल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन के शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इसमें उनसे ये सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बच्चों की नींद पूरी हो। इसके लिए स्कूल और पढ़ाई-लिखाई संबंधी नए जारी किए गए कायदों पर उनसे सख्ती से अमल करने को कहा गया है। नई जारी गाइडलाइन में यह बताया गया है कि स्कूल कब खुलने और बंद होने चाहिए और माता-पिता को अपने बच्चों का पालन-पोषण कैसे करना चाहिए।

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बच्चों की नींद में खलल न पड़े, इसके लिए गाइडलाइन में सुबह बेहद जल्दी स्कूल खोलने पर रोक लगा दी गई है। इसी तरह कहा गया है कि एक्स्ट्रा-कैरिकुलर क्लास देर शाम तक नहीं चलनी चाहिए। माता-पिता से यह ध्यान रखने को कहा गया है कि बच्चे रात दस बजे के बाद वीडियो गेम ना खेलें। इसके पहले 2007 में चीन सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। उसमें कहा गया था कि प्राइमरी स्कूल के बच्चों को कम से कम 10 घंटे जरूर सोना चाहिए। उसके मुताबिक जूनियर हाईस्कूल के छात्रों को नौ घंटे और हाई स्कूल के छात्रों को आठ घंटे जरूर सोना चाहिए।

बीते दिसंबर में शिक्षा मंत्रालय ने एक अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें कहा गया कि प्राइमरी स्कूल के बच्चे औसतन साढ़े नौ घंटे और सेकंडरी स्कूल के बच्चे औसतन सिर्फ 8.4 घंटे की नींद ही ले रहे हैं। इसी रिपोर्ट को आधार बना कर अब शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों और अभिभावकों से कहा है कि बच्चों की नींद पूरी हो, इसे सुनिश्चित करना उनकी साझा जिम्मेदारी है। साथ ही मंत्रालय ने आदेश दिया है कि प्राइमरी स्कूलों में सुबह 8.20 बजे से पहले कक्षा शुरू नहीं होनी चाहिए, ताकि बच्चों को बहुत जल्दी ना उठना पड़े। उधर एलिमेंट्री स्कूल के बच्चों को रात 9.20 बजे, मिडल स्कूल के छात्रों को रात 10 बजे और हाई स्कूल के छात्रों को रात 11 बजे तक हर हाल में अपने बिस्तर पर चले जाना चाहिए।
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शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की राय है कि वीडियो गेम बच्चों की नींद पूरी ना होने की प्रमुख वजह हैं। इसलिए रात दस बजे से सुबह आठ बजे तक इन खेलों के खेलने पर रोक लगा दी गई है। लेकिन वेबसाइट सिक्स्थटोन.कॉम के मुताबिक ये प्रतिबंध कैसे लागू किया जाएगा, इसे साफ नहीं किया गया है। इसके पहले नवंबर 2019 में अधिकारियों ने बच्चों को वीडियो गेम की आदतों से बचाने के उपाय घोषित किए थे। तब उन्होंने कहा था कि इन गेम्स का बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असर होता है। इसके अलावा बच्चे बड़ी मात्रा में पैसा इन खेलों पर बर्बाद करते हैं। उन उपायों में भी रात दस से सुबह आठ बजे तक इन खेलों के खेलने पर रोक लगाने की बात शामिल थी।

शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि बच्चों को ‘नींद संबंधी शिक्षा’ देने की जरूरत है। इससे उनका आम सेहत बेहतर होगी। जानकारों के मुताबिक बीते कुछ महीनों के अंदर चीन सरकार ने तमाम छात्रों को शिक्षा के दौरान समान धरातल उपलब्ध कराने के लिए कई कदम घोषित किए हैं। इनके तहत अब अच्छे मिडल और हाई स्कूलों में दाखिले के लिए लॉटरी का सिस्टम लागू किया गया है। इसके पीछे मकसद यह है कि सभी तबकों के छात्रों को इन स्कूलों में पढ़ने का मौका मिल सके। सिर्फ उन लोगों के बच्चों को नहीं, जो अपने महंगे प्राइमरी स्कूलों का खर्च वहन कर सकते हैं।

चीन सरकार ने कहा है कि उसका मकसद शैक्षिक प्रतिस्पर्धा को घटाना है, ताकि बच्चे मानसिक रूप से स्वस्थ रहें। इसके लिए प्राइमरी स्कूलों में होमवर्क का सिस्टम खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा वीचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के ग्रेड पोस्ट करने के चलन पर रोक लगा दी गई है।

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