चीन इस महीने के अंत तक हांगकांग में विवादस्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर सकता है। चीन में कानून बनाने वाले शीर्ष निकाय नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति ने रविवार को तीन दिवसीय सत्र की घोषणा की, जो बीजिंग में 28 से 30 जून तक चलेगा। सूत्रों का कहना है कि इस सत्र के संभावित मुद्दों में हांगकांग सुरक्षा कानून भी शामिल है। माना जा रहा है कि इस दौरान विधेयक को पारित किया जा सकता है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया, चीन ने शनिवार देर रात इस विधेयक की कुछ जानकारी सार्वजनिक की हैं, जिससे हांगकांग पर कब्जे को लेकर चीन के मंसूबों का आभास हो जाता है। प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक, चीन हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय स्थापित करेगा ताकि खुफिया जानकारी इकट्ठा की जा सके। इसके जरिये वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आपराधिक मामलों से भी निपटेगा। हांगकांग पुलिस और अदालतें मामलों पर क्षेत्राधिकार बनाए रखेंगी, लेकिन यह कानून चीनी अधिकारियों को विशेष परिस्थितियों में कुछ आपराधिक मामलों में क्षेत्राधिकार देगा। हालांकि ये विशेष परिस्थितियां क्या होंगी, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। मसौदे में कहा गया है कि अगर हांगकांग के स्थानीय कानून इसके असंगत होते हैं तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू हो। इसके लिए हांगकांग सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग बनाना होगा, जिसकी निगरानी चीनी सरकार करेगी। बता दें कि चीन ही हांगकांग के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करेगा।
जल्दबाजी में बुलाया सत्र
सूत्रों का कहना है कि चीन ने कानून लागू करने को जल्दबाजी में सत्र बुलाया है। बीते शनिवार को ही एनपीसी की तीन दिवसीय बैठक खत्म हुई है और उसके एक सप्ताह बाद सत्र बुलाया जाना थोड़ा खटकता है। दरअसल एनपीसी की बैठके आमतौर पर दो महीने के अंतराल में होती हैं। माना जा रहा है चीन एक जुलाई की छुट्टी से पहले प्रस्तावित कानून को पारित करना चाहता है। एक जुलाई को हांगकांग में चीन की वापसी के दिन के तौर पर मनाया जाता है।
कैरी लाम ने बताया महत्वपूर्ण पहल
इस बीच, हांगकांग के नेता कैरी लाम ने प्रस्तावित मसौदे को महत्वपूर्ण पहल बताया है। लाम का कहना है कि इस अहम क्षण में यह 75 लाख लोगों की दीर्घकालिक समृद्धि और स्थिरता की रक्षा करेगा। गौरतलब है कि चीन ने लाम को सुरक्षा कानून के तहत मुकदमों के लिए जज नियुक्त करने का अधिकार दिया है। लाम को नियुक्ति का अधिकार देने पर लोकतंत्र समर्थकों और कानूनविदें ने हैरानी जताई है।