चीन का लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट हैनान के वेनचांग लॉन्च साइट से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद फट गया। इस हादसे में रॉकेट के साथ जा रहा सैटेलाइट भी नष्ट हो गया। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, रॉकेट में हुए इस विस्फोट की जांच की जा रही है। लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट का यह अब तक का पहला असफल मिशन है।
रॉकेट ने अपने पहले चरण की उड़ान वेनचांग से भरी थी। लेकिन उड़ान भरने के करीब 85 सेकंड बाद ऊपर जाने के शुरुआती चरण में इसमें कुछ खराबी दिखाई दी। इस घटना के कारण मिशन विफल हो गया। इससे चीन की लगातार बढ़ रही रॉकेट लॉन्च गतिविधियों को झटका लगा है।
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लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट की क्या खासियत है?
लॉन्ग मार्च 7ए एक मध्यम से भारी वजन वाले सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ले जाने वाला रॉकेट है। इसे चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी ने बनाया है। इसे मुख्य रूप से सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट यानी जीटीओ तक पहुंचाने के लिए बनाया गया है। यह चीन के रॉकेटों के परिवार का एक अहम हिस्सा है।
सीजेड-7ए, लॉन्ग मार्च 7 से बनाया गया है। इसमें लिक्विड-फ्यूल इंजन वाला एक मुख्य हिस्सा और उसके साथ बूस्टर लगे हैं। इसका डिजाइन चीन को ज्यादा भारी पेलोड को पृथ्वी से ज्यादा ऊंचाई की अंतरिक्ष कक्षाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।
रॉकेट में विस्फोट क्यों हुआ?
रॉकेट में विस्फोट क्यों हुआ, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं चला है। जांचकर्ता रॉकेट से मिले टेलीमेट्री और दूसरे डेटा का विश्लेषण करेंगे। इसका मकसद यह पता लगाना है कि पहले चरण में रॉकेट के ऊपर जाने के दौरान आखिर क्या गड़बड़ी हुई।
उड़ान का शुरुआती चरण अहम क्यों?
उड़ान का शुरुआती चरण अहम होता है। इस दौरान रॉकेट पर हवा का दबाव तेजी से बदलता है। रॉकेट में तेज कंपन होता है। साथ ही, उसे जमीन से उड़ान भरने के बाद वातावरण में बहुत तेज गति से आगे बढ़ने के कठिन बदलाव से गुजरना पड़ता है।
चीन के लॉन्च कार्यक्रम पर क्या असर?
चीन ने हाल के वर्षों में रॉकेट लॉन्च करने की रफ्तार काफी बढ़ाई है। लॉन्ग मार्च रॉकेटों का परिवार उसके ऑर्बिटल कार्यक्रम की रीढ़ बना हुआ है। वेनचांग भी चीन के कुछ सबसे शक्तिशाली रॉकेटों और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक बड़ा लॉन्च सेंटर बन गया है।
इस असफलता के बावजूद चीन के बड़े अंतरिक्ष लॉन्च कार्यक्रम में कोई बुनियादी बदलाव होने की संभावना कम है। हालांकि, अंतरिक्ष उद्योग इस जांच पर करीब से नजर रखेगा। इंजीनियर यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि खराबी की वजह क्या थी और भविष्य के सीजेड-7ए मिशनों में ऐसी घटना दोबारा न हो।