चीन लोगों में डर कायम करना चाहता है कि जो भी इन तिब्बतियों का स्वतंत्र नेतृत्व करने का प्रयास करेगा, या लोकप्रियता पाने के लिए काम करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। 11वें पंचेन लामा के रूप में गेधुन चोइकी का जन्म 25 अप्रैल 1989 को तिब्बत के ल्हारी ग्रामीण अंचल में हुआ। 10वें पंचेन लामा की मौत के बाद उन्हें 14 मई 1995 को 11वां पंचेन लामा चुना गया। इसके सिर्फ तीन दिन बाद चीनी प्रशासन ने उनका अपहरण कर लिया।
चीन ने करीब दो दशक से 11वें पंचेन लामा का अपहरण करके उन्हें गायब कर रखा है। पंचेन लामा गेलुग्पा पंथ के तिब्बती बौद्धों के अवतार (तुल्कू) माने जाते हैं। वे दलाई लामा के बाद न केवल सर्वोच्च धार्मिक पद रखते हैं, बल्कि नए दलाई लामा की पहचान के लिए बनी लामा परिषद के प्रमुख भी होते हैं। चीन द्वारा पंचेन लामा के अपहरण के बाद से विश्व भर के तिब्बती बौद्ध उन्हें एक बार देखने की अधूरी उम्मीद के साथ जी रहे हैं।
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चीन लोगों में डर कायम करना चाहता है कि जो भी इन तिब्बतियों का स्वतंत्र नेतृत्व करने का प्रयास करेगा, या लोकप्रियता पाने के लिए काम करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। 11वें पंचेन लामा के रूप में गेधुन चोइकी का जन्म 25 अप्रैल 1989 को तिब्बत के ल्हारी ग्रामीण अंचल में हुआ। 10वें पंचेन लामा की मौत के बाद उन्हें 14 मई 1995 को 11वां पंचेन लामा चुना गया। इसके सिर्फ तीन दिन बाद चीनी प्रशासन ने उनका अपहरण कर लिया। उस समय वे केवल 6 साल के थे, साथ परिवार के लोग भी गायब कर दिए गए। कुछ महीने बाद प्रशासन ने बताया कि उन्होंने ग्यानकेन नोरबू को नया पंचेन लामा चुना है।
साधारण जीवन जी रहे हैं पंचेन लामा
चीन द्वारा अपहरण किए गए असली पंचेन लामा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। चंद बयान दिए गए कि अलगाववादियों द्वारा अपहरण किए जाने से बचाने के लिए उन्हें सुरक्षा दी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि द्वारा गेधुन की सलामती के बारे में जानकारी मांगी गई। 17 जुलाई 2017 को चीन ने बयान दिया कि वह एक सामान्य तिब्बती लड़के की तरह स्कूल जाते हैं, और साधारण जीवन जी रहे हैं। उन्होंने खुद को परेशान न करने की गुजारिश की है।
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क्यों हुआ अपहरण
चीन को पंचेन लामा का अपहरण करने की जरूरत क्यों हुई? उसे वह छिपाकर क्यों रखे हुए है? इन सवालों के कई जवाब हैं।
पंचेन लामा चूंकि प्रमुख धार्मिक व राजनीतिक नेतृत्व रखते हैं, वे दलाई लामा के साथ अहम दर्जा रखते हैं। दोनों ही तिब्बतियों के गेलुग्पा पंथ के तहत आते हैं, यह पंथ भावी नेतृत्व के अवतार या कहें पुनर्जन्म में विश्वास रखता है। नये नेतृत्व की पहचान भी यही करता है।
10वें पंचेन लामा चोएस्की ग्लात्सेन को चीन ने दबाव में लाकर कुछ हद तक अपने अनुरूप उपयोग किया। लेकिन बाद में उन्होंने मजबूती से खुद को प्रस्तुत किया। चीन इस व्यवहार से डरता है।