रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-चीन कई दौर की बातचीत के बाद फरवरी में सीमा के पास कुछ इलाकों से अपनी सेनाएं और सैन्य साजोसामान वापस बुला रहे हैं। दोनों पक्षों ने पहले पैंगोंग त्सो के आसपास अपने सैनिकों को हटाने का फैसला किया। लेकिन पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेपसांग जैसे क्षेत्र अभी संघर्ष की स्थिति से बाहर नहीं निकले हैं। इसे विवाद का खत्म होना ही नहीं कहा जा सकता। यह आगे एक बार फिर से करवट ले सकता है।
भारत ने नीति बदली, पाक पर सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा
रिपोर्ट में कहा है कि यदि पाकिस्तान भारत को फिर उकसाता है, तो पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है। पाकिस्तान के प्रत्यक्ष या परोक्ष उकसावे की कार्रवाई का जवाब है। भारत अब पहले के मुकाबले और अधिक सैन्य ताकत से जवाब दे सकता है। हालांकि भारत पाकिस्तान में पारंपरिक युद्ध की आशंका न के बराबर है। फिर भी दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच तनाव बढ़ने का खतरा है।
कश्मीर में अशांति, हिंसक माहौल या भारत में आतंकी हमले से इसकी पूरी आशंका है। भारत ने अपनी नीति बदल दी है और ऐसे में भारत सरकार सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। तनाव की यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
चीन का यही रवैया ताइवान में भी है, जहां वह एकीकरण के लिए दबाव बढ़ाता रहेगा। यहां एकीकरण के लिए वह बल प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेगा। क्योंकि चीन इसे अपना बागी इलाका मानता है। चीन हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी तेजी से सैन्य व आर्थिक प्रभाव बढ़ाया है। इससे क्षेत्र में चिंता पैदा हो गई हैं। उसका दक्षिण चीन सागर तथा पूर्वी चीन सागर में भी गंभीर क्षेत्रीय विवाद है। इससे खींचतान की आशंका बढ़ेगी।
चीन रिपोर्ट के मुताबिक, अपना प्रभुत्व बढ़ाने की ड्रैगन की कोशिश अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बीजिंग जबरदस्त साइबर हमलों से अमेरिका के बेहद जरूरी आधारभूत ढांचे को नाकाम कर सकता है। अमेरिका के लिए खतरों की सूची में चीन को पहले पायदान और इसके बाद रूस, ईरान और उत्तरी कोरिया को रखा गया है।
कहा गया है कि ड्रैगन की रणनीति अमेरिका और उसके साथियों में दरार डालने की है। वह टीका कूटनीति के जरिए भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करेगा। उन देशों को टीके देगा जिनसे उसे फायदा उठाना है। वह वैश्विक मानदंड बदलने की ओर बढ़ रहा है।
रूस सीधे टकराव से बचेगा
रूस को लेकर कहा है कि वह सीधे टकराव के बजाय प्रभाव जमाने वाले अभियान, अपने हित बढ़ाने वाले सैन्य अभ्यासों और अमेरिको हितों को कमजोर करने के लिए रास्ते अपनाएगा। वह अमेरिकी चुनाव को भी ऐसे मौके के रूप में देखता है जिसके जरिए वह दुनिया में अमेरिका की हैसियत घटा सकता है।
खुफिया एजेंसियों को पता लगा है कि ईरान में फिलहाल अहम परमाणु हथियार विकसित करने के गतिविधियां तो नहीं चल रहीं पर प्रतिबंधों में राहत के बिना उसके नेताओं का अमेरिका से बातचीत में हिचकिचाना जारी रह सकता है।
खतरनाक मोड़ पर दुनिया
महामारी के बाद पूरी दुनिया लंबे समय तक अस्थिरता की शिकार रह सकती है। राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्थाओं के स्वरूप में बुनियादी बदलाव आ सकता है। आर्थिक परिणामों के कारण बहुत से देशों में अस्थिरता आ सकती है।
नौकरियां जाने और सप्लाई चैन में बाधा के कारण बड़े दबावों की वजह से लोग अधिक बेसब्र हो सकते हैं। देशों में अंदरूनी टकराव, विस्थापन, सरकारों के गिरने का जोखिम बढ़ गया है।