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घातक हथियारों के मामले में कई देशों से आगे निकला चीन

Thu, 17 Jan 2019 02:34 AM IST
संदीप भट्ट वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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चीन की लगातार बढ़ती सैन्य क्षमता ने अमेरिका को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका के एक शीर्ष खुफिया अधिकारी ने कहा कि चीन तेजी से अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है, ताकि दुनिया पर अपना वर्चस्व बना सके। 

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चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता पर अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से जारी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया कि चीन पूर्व और दक्षिण चीन सागर में भी सेना की मौजूदगी बढ़ा रहा है। चीन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का इस्तेमाल ताकत दिखाने वाले उपकरण के रूप में करना चाहता है।

इसलिए वह हाइपरसोनिक हथियारों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के मामले में लगातार इजाफा कर रहा है और अब उसने कई देशों को काफी पीछे छोड़ दिया है। सीनियर डिफेंस इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेन टेलर ने कहा, ‘चीन जमीन, वायु, समुद्र, अंतरिक्ष और सूचना क्षेत्र में क्षमताओं का विस्तार करने के साथ मजबूत घातक बल का निर्माण कर रहा है, जिससे वह क्षेत्र में और उसके बाहर अपनी धाक जमा सकेगा। भविष्य में परमाणु शक्ति संतुलन, पावर प्रोजेक्शन, साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे क्षेत्रों में आधुनिकीकरण पीएलए की बढ़ती क्षमताओं में अहम कारक साबित होंगे।’
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अधिक कुशल हो सकती है पीएलए 

टेलर ने कहा कि चीन नए मध्यम और लंबी दूरी के स्टील्थ बॉम्बर (रडार से बच निकलने में सक्षम बमवर्षक) का भी निर्माण कर रहा है, जिनमें क्षेत्रीय और वैश्विक लक्ष्यों तक मार करने की क्षमता है। इन बमवर्षक विमानों के साल 2025 तक तक बेड़े में शामिल होने की संभावना है।

बंदरगाहों तक पहुंच बढ़ा रहा चीन

पेंटागन ने चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) परियोजना को लेकर भी चिंता जताई है। पेंटागन ने कहा कि ओबीओआर के जरिये चीन हिंद महासागर और अन्य सागरों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के लिए पाकिस्तान में ग्वादर सहित अन्य विदेशी बंदरगाहों तक अपना विस्तार कर रहा है। अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में वाणिज्यिक बंदरगाहों तक पहुंच बढ़ाने की चीनी सेना की कोशिशों से भविष्य में बंदरगाहों तक सैन्य साजोसामान मुहैया कराने की आवश्यकता पूरी होगी। 


हिंद महासागर में शक्ति का प्रदर्शन  

पेंटागन ने कहा कि चीन अपना पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत बना रहा है। बीजिंग संभवत: हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए इस जहाज का इस्तेमाल करेगा। पोत के 2019 तक चीनी बेड़े में शामिल होने की संभावना है। 
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