इस सम्मेलन में हुए भाषणों में भी चीन की खूब चर्चा हुई है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने अपने भाषण में एलान किया- मैं अब ऐसा कोई समझौता नहीं होने दूंगा, जिससे कम्युनिस्ट चीन को फायदा पहुंचे और अमेरिकी कामगारों को नुकसान हो।
ट्रंप के 'मागा' अभियान को भारी समर्थन
विश्लेषकों ने कहा है कि सीपीएसी में चल रही चर्चाओं को देख कर ये अंदाजा लगता है कि ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट एजेंडे को रिपब्लिकन पार्टी में किस हद तक समर्थन हासिल हो चुका है। ट्रंप ने जो ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (मागा) अभियान चलाया, उसका गहरा असर देश के कंजरवेटिव तबकों पर हुआ है। ये असर इतना गहरा है कि रिपब्लिकन पार्टी और उसके समर्थकों की निगाह में अब अमेरिका के लिए मुख्य खतरा इस्लाम की जगह चीन बन गया है। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर आतंकवादी हमलों के बाद इस्लाम को ये तबके अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे। ये राय डेढ़ दशक तक हावी रही। लेकिन ट्रंप के दौर में चीन पर उनका ध्यान केंद्रित हो गया।
वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम पर छपे एक विश्लेषण के मुताबिक कंजरेवेटिव खेमों की सोच में आया ये बदलाव सीएपीसी के पिछले साल के सम्मेलन में भी जाहिर हुआ था। तब सम्मेलन में सिर्फ एक ऐसा सत्र हुआ था, जिसमें इस्लाम से संबंधित विषय पर चर्चा हुई थी। इस सत्र का टाइटल ‘ईरान के खतरे से कैसे निपटा जाए’ था। इस साल तो सम्मेलन में ईरान का जिक्र भी नहीं हुआ है। विदेशी आतंकवाद और पश्चिमी एशिया जैसे विषय भी चर्चा गायब हैं। यहां तक कि खतरे के रूप में रूस का भी महज जिक्र ही हुआ है।
कंजरवेटिव आंदोलन में चीन मुख्य मुद्दा
इंडियाना राज्य से हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के रिपब्लिकन सदस्य जिम बैंक्स ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- ‘देश में आगे बढ़ रहे कंजरवेटिव आंदोलन में चीन मुख्य मुद्दा है।’ उन्होंने कहा कि अगर रिपब्लिकन पार्टी को 2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीतना है और उसके पहले 2022 में कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में बहुमत पाना है, तो हमें चीन के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखना होगा, ताकि हम डेमोक्रेट्स को चीन समर्थक पार्टी के रूप में पेश कर सकें।
विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन पर रिपब्लिकन पार्टी के इस रुख का दबाव साफ दिखता है। इसी कारण वे लगातार ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन के प्रति वे भी उतने ही सख्त हैं। इसी स्थिति का नतीजा है कि अमेरिकी कांग्रेस में चीन के खिलाफ मानवाधिकार हनन से लेकर खराब व्यापार व्यवहार के मामले में जो प्रस्ताव रखे गए हैं, उसे दोनों पार्टियों के सांसदों का समर्थन मिला है।