विदेशों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चीन ज्यादातर एनजीओ का सहारा लेता है। काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ पीसफुल नेशनल रीयूनिफिकेशन नामक यह संगठन अब नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों को प्रभावित कर रहा है।
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तिब्बत राइट्स कलेक्टिव ने एक रिपोर्ट में बताया कि नेपाल सरकार पर इस संगठन का असर यहां के तिब्बती शरणार्थियों के अधिकार प्रभावित कर रहा है।
दरअसल, नेपाल को चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट के संभावित भागीदार के रूप में देखता है और नेपाली सरकार ने देश में तिब्बती गतिविधियों को रोकने के लिए लाखों डॉलर के चीनी निवेश के वादों का हवाला दिया है। ऐसे में नेपाल में बसे 15,000 तिब्बतियों के अधिकार अधर में हैं।
नेपाल में चीन-नियंत्रित मोर्चे के तहत चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अपना असर छोड़ रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाल सरकार ने तिब्बती शरणार्थियों के स्कूल और कॉलेज में दाखिले, बैंक खाते खोलने और उन्हें व्यवसाय खोलने से भी प्रतिबंधित कर दिया है।