भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया, उत्तर कोरिया, ईरान और वियतनाम को साइबर शक्ति की तृतीय श्रेणी में रखा गया है। आईआईएसएस में साइबर, अंतरिक्ष और भावी युद्ध मामलों के विशेषज्ञ ग्रेग ऑस्टिन के मुताबिक चीन की डिजिटल प्रगति के बारे में छपने वाली मीडिया रिपोर्टों के कारण उसकी साइबर क्षमता के बारे में अतिशयोक्तिपूर्ण धारणा बनी है। सच ये है कि साइबर सुरक्षा के कौशल में किसी भी पैमाने पर वह कई दूसरे देशों से बदतर स्थिति में है।
ऑस्टिन का कहना है कि सूचना युग वैश्विक शक्ति संतुलन को नया रूप दे रहा है। इसलिए परंपरागत रूप से शक्तिशाली रहे भारत और जापान जैसे देश इस क्षेत्र में बाकी देशों से पिछड़ रहे हैं। साइबर क्षमता के लिहाज से वे अभी तीसरी श्रेणी में हैं। जबकि इस्राइल और ऑस्ट्रेलिया जैसे छोटे देश अपने आधुनिक साइबर कौशल के कारण दूसरी श्रेणी में पहुंच गए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इस स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
वैसे आईआईएसएस का कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर रैनसमवेयर हमलों (फिरौती के लिए साइबर हमलों) का खतरा हाल के समय में बढ़ा है। इस रिपोर्ट के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी जीसीएचक्यू के पूर्व निदेशक रॉबर्ट हैनिगन ने कहा कि मैं इस रिपोर्ट के कई निष्कर्षों से सहमत हूं, लेकिन यह मान लेना कि साइबर शक्ति के क्षेत्र में रूस और चीन की मौजूदा कमजोरी आगे भी ऐसे ही बनी रहेगी, सही निष्कर्ष नहीं होगा।