चीन ने नेपाल के राजनीतिक दलों से आपसी मतभेद भुला देने की अपील की है। उसने नेपाली पार्टियों से कहा है कि उन्हें देश की एकता और देश के अंदर स्थिरता को कायम रखने के लिए काम करना चाहिए, ताकि नेपाल विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ सके। इस बयान का यहां मतलब यह लगाया गया है कि हाल की नाकामी के बावजूद चीन ने नेपाल की अंदरूनी राजनीति में दखल देना अभी बंद नहीं किया है।
गौरतलब है कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बीते दिसंबर में जब अचानक संसद के निचले सदन को भंग कराने का फैसला किया था, तो उसके तुरंत बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल का दौरा किया था। चीनी दल ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के ओली और प्रचंड गुटों को एकजुट करने की कोशिश की थी। तब चीन ने नेपाल की अंदरूनी घटनाओं के दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकने वाले असर को लेकर खुली चिंता जताई थी।
दिसंबर में नेपाल आए चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप-मंत्री गुओ येझाउ ने किया था। प्रतिनिधिमंडल चार दिन नेपाल में रहा और इस दौरान नेपाल के सभी बड़े नेताओं से बातचीत की। लेकिन वह नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के ओली और दहल गुटों के बीच एकता कराने में नाकाम रहा।
अब चीन ने अपनी चिंता नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान जताई। चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों के बीच नेपाल की घरेलू राजनीतिक स्थिति और कोरोना वैक्सीन के मामले में सहयोग को लेकर बातचीत हुई। इस दौरान चीनी विदेश मंत्री ने ग्यावली को बताया कि चीन अनुदान के आधार पर नेपाल को कोरोना वैक्सीन की पांच लाख डोज देगा।
उधर, ग्यावली ने कहा कि नेपाल हर हाल में चीन का दोस्त बना रहेगा। उन्होंने कहा कि चीन ने नेपाल की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता के लिए जो समर्थन दिया है, नेपाल उसका आभारी है। उन्होंने कहा कि नेपाल वन चाइना पॉलिसी पर चलता रहेगा और अपनी जमीन से किसी को चीन विरोधी गतिविधि में शामिल होने की इजाजत नहीं देगा।
विश्लेषकों का कहना है कि नेपाली अधिकारी हाल के दिनों में बार-बार चीन के नेताओं को यह आश्वासन दे रहे हैं कि नेपाल वन चाइना नीति पर चलता रहेगा। इस नीति का व्यावहारिक अर्थ यह होता है कि ताइवान और तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग माना जाए। ताइवान को लेकर हाल में अमेरिकी नीति में आए बदलाव के मद्देनजर नेपाल के इस आश्वासन को महत्वपूर्ण समझा जा रहा है।
चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक वांग ने कहा कि चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल ना देने की नीति पर चलता है। साथ ही वह नेपाली जनता द्वारा चुनी गई विकास की दिशा का सम्मान करता है। विश्लेषकों का कहना है कि जिस समय चीन ने नेपाल की अंदरूनी राजनीति घटनाओं में सीधी मध्यस्थता की कोशिश की और नेपाली राजनीतिक दलों को साफ शब्दों में सलाह दे रहा है, उसके बीच यह दावा एक विडंबना ही है।