इसी हफ्ते चीन ने हाइपरसोनिक हथियार बनाने के बारे में एक बड़ा दावा किया। दुनियाभर के सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे गंभीरता से लिया है। हालांकि इस दावे के बारे में अभी कोई सबूत सामने नहीं आया है, फिर भी चीन की हालिया कामयाबियों को देखते हुए विशेषज्ञ इसे खारिज करने के मूड में नहीं हैं।
सबसे पहले इस बारे में खबर हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने छापी। उसके बाद कई दूसरे मीडिया संस्थानों ने भी इसे प्रमुखता से पेश किया। इनके मुताबिक इस परियोजना पर काम कर रही चीनी रिसर्च टीम के प्रमुख यांग शियाओगांग हैं। इस टीम को 2025 तक हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी से संबंधित तमाम समस्याओं का हल ढूंढ लेने का काम सौंपा गया है।
कुछ महीने पहले चीनी वैज्ञानिकों ने अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक हथियार बना लेने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि ये हथियार इंफ्रारेड हॉमिंग एडवांस्डमेंट पर आधारित हैं। वेबसाइट यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसके बारे में माना जाता है, अमेरिका 2035 तक इसे हासिल नहीं कर पाएगा। वैसे हाल में अमेरिका ने दावा किया था कि उसने अपने बम वर्षक विमान बी-52-एच से हाइपरसोनिक मिसाइल दागने का सफल प्रयोग किया है। उसके बाद उसने हवा से दागी जाने वाली- एयर लॉन्च रैपिड रेस्पॉन्स वीपंस (एआरआरआरडब्लू) का भी सफल परीक्षण करने का दावा किया।
चीन के सामरिक जर्नल टैक्टिकल मिसाइल टेक्नलॉजी में इस साल जनवरी में एक रिपोर्ट छपी, जिसके मुताबिक चीन की हाइपरसोनिक परियोजना में लगभग तीन हजार वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। ये संख्या परंपरागत हथियारों के विकास के लिए कार्यरत वैज्ञानिकों से दोगुना ज्यादा है। विश्लेषकों के मुताबिक चीनी सेना यह मान कर चल रही है कि हाइपरसोनिक हथियारों से युद्ध का पूरा नजारा ही बदल जाएगा। इसलिए चीन इस टेक्नोलॉजी में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
एक चीनी वैज्ञानिक ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि जमीन से हवा में मार करने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल सेकंडों के भीतर अपने निशाने को नष्ट कर सकती है। वह हमला करने आ रहे किसी लड़ाकू विमान से गिराए गए बम को रास्ते में ही नष्ट करने में सक्षम होगी।