राष्ट्रपति ट्रंप ने यह संकेत देकर अमेरिका-चीन में ट्रेड वॉर पर होने वाली वार्ता को संशय में धकेल दिया है कि दो महाशक्तियों के बीच सितंबर में प्रस्तावित बैठक नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘हम देखेंगे कि सितंबर में बैठक करें या नहीं। अगर हम करेंगे तो ठीक है, और यदि नहीं करेंगे तो भी ठीक है।’ ट्रंप ने कहा कि व्यापार युद्ध से चीन बर्बाद हो चुका है।
उधर, आईएमएफ ने भी इस बयान पर मुहर लगाते हुए चीन की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान इस साल के लिए घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) का अनुमान यह मानकर लगाया गया कि चीन से आयात होने वाले सामान पर आगे कोई और शुल्क नहीं लगाया जाएगा। जबकि यदि अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर रोकने के मकसद से जारी वार्ता सितंबर में नहीं होती है, तो ट्रंप प्रशासन एक सितंबर से चीन के 300 अरब डॉलर मूल्य के अन्य उत्पादों पर भी 10 प्रतिशत का शुल्क लगा देगा।
इससे न सिर्फ चीन की सुस्त होती अर्थव्यवस्था गर्त में जा सकती है, बल्कि चीनी आर्थिक विकास दर में भी तेज गिरावट आ सकती है। शनिवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने साफतौर पर कहा है कि ‘चीन पिछले कई दशकों में सबसे बुरे साल से गुजर रहा है और इस कारण वह व्यापार समझौता करना चाहता है। लेकिन मैं समझौते के लिए तैयार नहीं हूं। चीन का हाल अभी और बुरा होने वाला है। हजारों कंपनियां चीन छोड़ रही हैं।’
सितंबर वार्ता नहीं हुई तो बिगड़ेंगे हालात
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने कहा, अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और अधिक बढ़ने के चलते चीन की आर्थिक वृद्धि दर कम होना तय है। यानि अमेरिका यदि 300 अरब डॉलर के चीनी सामान पर 10 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाता है तब भी अब तक लगे 25 प्रतिशत के आयात शुल्क के कारण ही चीन की आर्थिक वृद्धि दर अगले 12 महीने में करीब 0.80 प्रतिशत कम हो सकती है।
ऐसे में यदि सितंबर में वार्ता नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं। आईएमएफ ने दुनिया की दो सबसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच जारी व्यापारिक तनाव को यथाशीघ्र सुलझाने की भी अपील की है।