अमेरिका और चीन के बीच 2020 के शुरु में हुआ व्यापार समझौता अपने मकसद को हासिल करने में नाकाम रहा है। ये समझौता डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए हुआ था। ट्रंप प्रशासन ने तब दावा किया था कि इस समझौते की वजह से अमेरिका-चीन के आपसी कारोबार में अमेरिका का व्यापार घाटा कम होगा। लेकिन 2021 में अमेरिका के इस व्यापार घाटे में 14.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह बढ़ कर 355.3 डॉलर तक पहुंच गया। ये आंकड़े इसी हफ्ते अमेरिका के सेन्सस ब्यूरो ने जारी किए हैं।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता जनवरी 2020 में हुआ था। उसे व्यापार समझौते का पहला चरण कहा गया था। लेकिन उसके बाद दोनों देशों के संबंध तेजी से बिगड़े। इस कारण इस समझौते के अगले चरणों पर बातचीत नहीं हो सकी। जनवरी 2020 में हुए समझौते में प्रावधान था कि चीन हर साल 2017 की तुलना में अमेरिका से 200 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त खरीदारी करेगा। चीन ने इस करार में अमेरिका से अधिक कृषि, कारखाना एवं ऊर्जा उत्पाद, और सेवाओं की खरीदारी करने का वादा किया था।
लेकिन बाद में ट्रंप प्रशासन ने चीन से होने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिए। जो बाइडन प्रशासन ने भी उन शुल्कों को जारी रखा है। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि इस समझौते के पहले 2019 में अमेरिका का व्यापार घाटा कम हुआ था। उस वर्ष यह 344.3 बिलियन डॉलर रहा। 2020 में भी इसमें गिरावट आई। उस साल चीन से अमेरिका का व्यापार घाटा 310.3 बिलियन डॉलर रहा। लेकिन 2021 में ट्रेंड पलट गया। इसकी वजह चीन से आयात में भारी बढ़ोतरी होना है। 2021 में अमेरिका ने चीन से 506.4 बिलियन डॉलर के सामान आयात किए।
अब बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने अमेरिकी मीडिया से कहा है कि चीन को लेकर अमेरिका का सब्र टूट रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन ने अमेरिका से अधिक खरीदारी करने का अपना वादा नहीं निभाया है। अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल बाइडन प्रशासन इस मसले का हल निकालने के लिए चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है।
उधर चीन के विशेषज्ञों और कारोबारियों ने मौजूदा हाल के लिए अमेरिका को ही दोषी ठहराया है। उनकी दलील है कि अमेरिका में चीनी वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क वहां महंगाई की ऊंची दर के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका इन शुल्कों को हटा ले, तो उससे वहां महंगाई कम होगी, और तब चीनी कंपनियां अमेरिका से अधिक खरीदारी के लिए प्रेरित होंगी।
अमेरिका में ताजा आंकड़े जारी होने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा- आर्थिक और व्यापार संबंधों में जो खास समस्याएं पैदा होती हैं, दोनों पक्षों को मिल कर उनका समाधान निकालना चाहिए। ऐसा पारस्परिक सम्मान और समानता की भावना और राय-मशविरे से किया जाना चाहिए।
उधर अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाय ने कहा है कि बाइडेन प्रशासन व्यापार समझौते में चीन की तरफ से बरती गई सभी खामियों का मूल्यांकन कर रहा है। उन्होंने ने कहा- यह साफ है कि चीन ने अपना वादा नहीं निभाया है। हम इसका समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं।