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हांगकांग में सियासत का चीन ने घोंट दिया है गला, मीडिया पर भी बढ़ा दबाव

Thu, 03 Dec 2020 04:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग

सार

  • लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को कुचलने के लिए कोरोना बना बहाना
  • नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए कई कार्यकर्ता
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Student Protest in Hong Kong - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के तीन कार्यकर्ताओं को जेल भेज दिया गया है। उन्हें बुधवार को सजा सुनाई गई थी। बताया जाता है कि जेल के खौफ के कारण कई दूसरे लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता इस शहर से भाग गए हैं। कई कार्यकर्ताओं पर पहले से मुकदमा चलाया जा रहा है। इन कार्यकार्ताओं पर हल्के से लेकर बेहद गंभीर तक इल्जाम लगाए गए हैं। जिन कार्यकर्ताओं को अब तक जेल भेजा गया है, उनमें से एक अग्नेस चाऊ पर सिर्फ यह आरोप था कि उन्होंने मेगाफोन पर नारे लगाए।

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इसके अलावा यहां की सिटी काउंसिल से लोकतंत्र समर्थक सभी सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं। मीडिया पर भी दबाव बढ़ जाने के संकेत हैं। ये सब नए लागू हुए सुरक्षा कानून का नतीजा है, जिसका यहां जोरदार विरोध हुआ था। लेकिन तमाम विरोध को नजरअंदाज कर चीन सरकार ने इस कानून को यहां लागू कर दिया। आरोप है कि कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के नाम पर लगाई गई पाबंदियों का इस्तेमाल भी लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को कुचलने में किया गया है।

अग्नेस चाऊ को बुधवार को सजा सुनाई गई। उनके साथ जोशुआ वॉन्ग और इवान लैम को भी दंडित किया गया है। ये सभी डेमोसिस्तो नामक राजनीतिक दल के सदस्य रहे हैं। इस पार्टी को अब भंग कर दिया गया है। 24 वर्षीय चाऊ अभी हाल तक छात्रा थीं। चाऊ 2014 से लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में सक्रिय रही हैं, लेकिन उनको जेल पहली बार भेजा गया है। जब उन्हें सजा सुनाई गई तो वे कोर्ट में रोने लगीं। बुधवार को अदालत ने लोकतंत्र समर्थक अखबार एपल डेली के संस्थापक जिमी लई को जमानत देने से इनकार कर दिया। जिमी की उम्र 70 साल से ज्यादा है। जमानत अर्जी नामंजूर होने का मतलब है कि अब उन्हें कम से कम अगले अप्रैल तक जेल में रहना होगा, क्योंकि अगली सुनवाई की तारीफ अप्रैल में ही दी गई है।
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यहां विश्लेषकों का कहना है कि चीनी अधिकारी शायद यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हांगकांग सिटी काउंसिल के अगले चुनाव में हिस्सा लेने के लिए कोई लोकतंत्र समर्थक मशहूर चेहरा मौजूद ना रहे। इसलिए वे तेजी से कार्यकर्ताओं और नेताओं को जेल भेज रहे हैं या उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर रहे हैं। हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का मौजूदा दौर पिछले साल आया था, जब चीन ने नया प्रत्यर्पण कानून लागू करने की कोशिश की। इस कानून में प्रावधान था कि हांगकांग में अपराध के आरोपी किसी व्यक्ति को मुकदमा चलाने के लिए चीन भेजा जा सकता है। अब लागू किए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जरिए यहां की राजनीति का चेहरा पूरी तरह बदल देने की कोशिश की जा रही है। इस कानून के तहत कई दलों को भंग किया गया है। साथ ही व्यक्तियों को उम्मीदवार बनने से रोकने का प्रावधान इस कानून में शामिल है।

इस कानून का इस्तेमाल कर यहां के अधिकारियों ने कई पूर्व पार्षदों और विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई की है। उन पर पिछले साल हुए आंदोलन में भाग लेने से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि यहां के मीडिया पर भी दबाव बना दिया गया है। लोकतंत्र समर्थक अखबार एपल डेली पर कुछ महीने पहले यहां छापा पड़ा। इसके संस्थापक जिमी लई पर कई आरोप लगाए हैं, जिनको लेकर उन पर मुकदमा चल रहा है। सरकारी टीवी चैनल आरटीएचके के एक प्रोड्यूसर को पुलिस के खिलाफ रिपोर्टिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यहां के प्राइवेट ब्रॉडकास्टर आई-केबल ने पिछले हफ्ते दो दर्जन लोगों को नौकरी से हटा दिया। ये मीडिया हाउस अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित रहा है।

लोकतंत्र समर्थक पूर्व पार्षद जेम्स को ने एक टीवी चैनल से कहा कि अब हांगकांग में कोई स्पष्ट राजनीतिक रास्ता उपलब्ध नहीं रह गया है। शांतिपूर्ण हो या हिंसक या फिर वह सरकार समर्थक ही क्यों ना हो, किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि की गुंजाइश यहां नहीं रह गई है।

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