चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अफगानिस्तान के लिए रूस के विदेश दूत जमीर कबुलोव की एक ही दिन कुछ घंटों के अंतर पर हुई काबुल यात्रा को यहां एक बेहद अहम घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। वांग ने गुरुवार को बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के यहां आने का फैसला किया। बताया गया कि यहां उनकी कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी और तालिबान के अन्य अधिकारियों के साथ कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। इनमें चीन की महत्त्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में अफगानिस्तान की संभावित भूमिका भी है।
कबुलोव के नेतृत्व में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल भी गुरुवार को यहां पहुंचा। अफगान सरकार के उप प्रवक्ता जिया अहमद तकल ने बताया कि रूसी दल के साथ अफगान अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच आर्थिक परियोजनाएं शुरू करने की संभावना पर बातचीत की। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद जो समीकरण दुनिया में बने हैं, उसके बीच चीन और रूस आपसी सहमति से भू-राजनीति पहल कर रहे हैं। यूरेशिया के एक बड़े हिस्से में वे अपना प्रभाव मजबूत करने की कोशिश में हैं। इसके बीच अफगानिस्तान को एक महत्त्वपूर्ण कड़ी समझा जाता है।
अफगान नेताओँ से बातचीत के दौरान वांग ने उन्हें चीन की नीति बताई। उन्होंने कहा कि चीन की अफगान नीति ‘तीन सम्मान’ और ‘तीन वर्जनाओं’ पर आधारित है। इसके तहत चीन अफगानिस्तान की स्वतंत्रता, संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करता है; वह अफगानिस्तान के धार्मिक विश्वासों और परंपराओं का सम्मान करता है; तथा वह अफगान जनता की तरफ से किए गए स्वतंत्र चयन का सम्मान करता है।
‘तीन वर्जनाओं’का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की आंतरिक स्थिति में चीन कभी दखल नहीं देगा; वह अफगानिस्तान में कभी अपना स्वार्थ साधने की कोशिश नहीं करेगा’, और वह अफगानिस्तान में कभी अपना कथित प्रभाव क्षेत्र बनाने का प्रयास नहीं करेगा। वांग ने कहा- ‘अफगान दोस्त अक्सर कहते हैं कि चीन अकेला देश है, जिसने कभी अफगानिस्तान को आहत नहीं किया।’