एक बाघिन, पांच शावक और जंगल में बड़े होते एक दुर्लभ परिवार की कहानी। चीन के जंगलों में पहली बार दर्ज किए गए जंगली साइबेरियाई बाघ के पांच शावकों का यह परिवार अब धीरे-धीरे बिखरने लगा है। पांच में से तीन शावक अपनी मां से अलग होकर स्वतंत्र जीवन की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि दो अभी उसके साथ हैं। इस दुर्लभ घटना ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान खींचा है, बल्कि चीन के उस जंगल में हो रहे बदलावों को भी सामने रखा है, जहां संरक्षण के प्रयासों के बीच बाघों की आबादी बढ़ रही है।
इस दुर्लभ परिवार की कहानी ऐसे समय सामने आई है, जब राष्ट्रीय उद्यान में बाघों और तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है। राष्ट्रीय वानिकी एवं घासभूमि प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यहां जंगली साइबेरियाई बाघों की संख्या 2017 में 27 थी, जो 2026 में बढ़कर 72 हो गई। इसी अवधि में जंगली तेंदुओं की संख्या 42 से बढ़कर 115 दर्ज की गई।पार्क प्रशासन के मुताबिक सीका हिरण, रो हिरण और जंगली सूअर जैसे जानवर बाघों के भोजन का प्रमुख आधार हैं। अधिकारी का कहना है कि सीका हिरणों की संख्या पहले की तुलना में तीन गुने से अधिक हो गई है। भोजन की बेहतर उपलब्धता से बाघिनों को शावकों के पालन-पोषण में मदद मिलती है।जंगलों में मानवीय गतिविधियां कम होने, वन क्षेत्र बहाल करने, वन्यजीव गलियारे विकसित करने और अवैध शिकार रोकने के लिए लगातार गश्त जैसे उपायों ने भी बाघों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में योगदान दिया है।
बाघों और तेंदुओं के संरक्षण के लिए चीन और रूस के बीच भी सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों ने 2024 में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए सीमा-पार संरक्षित क्षेत्र स्थापित करने का समझौता किया था। दोनों देशों के जुड़े संरक्षित क्षेत्रों का कुल विस्तार लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर बताया गया है।इस क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी के लिए उपग्रह आधारित जानकारी, ड्रोन और जंगल में लगे कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तकनीकी सहायता देने वाली कंपनी जिशी मीडिया के अधिकारी हू शिन्यू के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली प्रजातियों की पहचान में लगभग 90 प्रतिशत और अलग-अलग बाघों तथा तेंदुओं की पहचान में 80 प्रतिशत सटीकता हासिल करती है। 2017 में शुरुआती चरण में शामिल हुआ यह राष्ट्रीय उद्यान 2021 में औपचारिक रूप से स्थापित किया गया था। पांच शावकों वाला दुर्लभ परिवार इस बात की याद दिलाता है कि जंगल में संरक्षण की सफलता केवल बाघों की गिनती से नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित प्रजनन और अगली पीढ़ी के स्वतंत्र जीवन तक पहुंचने से भी समझी जाती है।