China Economic Crisis- China property Market
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चीन में प्रॉपर्टी मार्केट के गहराते संकट से अब पूरी अर्थव्यवस्था परेशान होती नजर आ रही है। जानकारों के मुताबिक प्रॉपर्टी बाजार के संकट को पहले जितना गंभीर माना गया था, स्थिति उससे कहीं ज्यादा खराब है। देश का बैंकिंग सिस्टम इस संकट के झटके से हिल गया है।
हांगकांग में लिस्टेट रियल एस्टेट कंपनी रॉनशाइन चाइना होल्डिंग्स ने बताया है कि इस वर्ष के पहले छह महीनों में उसका घाटा 4.8 बिलियन युवान तक रहने का अनुमान है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में इस कंपनी को साढ़े 68 करोड़ युवान का मुनाफा हुआ था। कंपनी के अध्यक्ष ओउ जोंगहोंग ने इस बदहाली के लिए देश में बनाए गए कठिन कारोबारी माहौल और कोविड-19 महामारी को दोषी ठहराया है। इन दोनों कारणों से चीन की अनगिनत रियल एस्टेट कंपनियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
हांगकांग में ही लिस्टेड कंपनी झेनरो प्रॉपर्टी ग्रुप को इस वर्ष पहली छमाही में तीन बिलियन युवान तक का घाटा होने का अंदेशा है। चीन के हिनान प्रांत स्थित कंपनी सेंट्रल चाइना रियल एस्टेट ने छह बिलियन युवान तक का घाटा होने का अनुमान जताया है। युझोऊ ग्रुप होल्डिंग्स नाम की कंपनी पिछले मार्च में डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) हो चुकी है। अब उसने बताया है कि इस वर्ष की पहली छमाही में उसके मुनाफे में 92 से 94 फीसदी की गिरावट दर्ज होने का अनुमान है। इन कंपनियों के वास्तविक आंकड़े बाद में सामने आएंगे। लेकिन बाजार की हालत को देख कर उनके अनुमान नकारात्मक और निराशाजनक होते जा रहे हैं।
संकटग्रस्त होने के कारण रियल एस्टेट कंपनियां उन प्रोजेक्ट्स को पूरा नहीं कर पा रही हैं, जिनके लिए वे फ्लैट बेच चुकी हैं। इससे नाराज हजारों खरीदारों ने बैंकों को कर्ज की किस्त चुकाना रोक दिया है। इससे बैंकिंग सेक्टर के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
रेटिंग एजेंसी मूडीज में विश्लेषक केली चेन ने कहा है कि इन कंपनियों के ताजा बयानों के बाद उन्हें क्रेडिट निगेटिव सूची में डालने की सूरत बन गई है। यानी इन कंपनियों को उस लिस्ट में डाल दिया जाएगा, जिनमें शामिल कंपनियों को कर्ज देना सुरक्षित नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को फ्लैट के दाम में भारी डिस्काउंट देना पड़ रहा है। इसकी वजह से उन्हें होने वाली आमदनी में तेजी से गिरावट आई है। इस वजह से चीन में रियल एस्टेट सेक्टर को अब निवेश के योग्य नहीं माना जा रहा है।
इस संकट से निपटने के लिए चीन सरकार ने उपाय किए हैं। इसके तहत बीते 22 अगस्त को उसने ब्याज दरों में ठोस कटौती की। इस फैसले के बाद चीन के सेंट्रल बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के गवर्नर यी गांग ने बैंकों से सुस्त पड़ रही अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने और रियल एस्टेट सेक्टर की धन संबंधी ‘विवेकपूर्ण’ आवश्यकताओं को पूरा करने की अपील की। लेकिन इन्वेस्टमेंट बैंक नोमुरा के चीन स्थिति मुख्य अर्थशास्त्री तिंग लू ने कहा है कि इस कदम का प्रॉपर्टी सेक्टर पर मामली असर होगा। उन्होंने कहा कि असल समस्या यह है कि कर्ज की मांग घट गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक तेज विकास दर के कारण दुनिया में प्रतिष्ठा बनाने वाले चीन के लिए यह बहुत गंभीर संकट है। उसकी पूरी अर्थव्यवस्था बीमार होती नजर आ रही है।