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चीन कर चुका फैसला : रूस को आर्थिक व सैन्य सहायता देगा, ड्रैगन को समझाइश के अमेरिकी प्रयासों को धक्का

Tue, 15 Mar 2022 10:37 AM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम

सार

अमेरिका के एनएसए जेक सुलिवन ने इटली की राजधानी रोम में चीन के एनएसए यांग जिएची के साथ सात घंटे की मैराथन बैठक की। 
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व्लादिमीर पुतिन और जिनपिंग(फाइल) - फोटो : Social media
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विस्तार
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रूस व चीन के दोस्ताना रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं। उसे निभाने के लिए चीन ने यूक्रेन जंग के बीच रूस की सैन्य व आर्थिक मदद का फैसला कर लिया है। इससे रूस की मदद नहीं करने के लिए चीन को राजी करने के अमेरिकी प्रयासों को धक्का पहुंचा है।

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अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि चीन यूक्रेन में सशस्त्र ड्रोन भेज सकता है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, जेक सुलिवन ने इटली की राजधानी रोम में चीन के एनएसए यांग जिएची के साथ सात घंटे की मैराथन बैठक की। इसमें उन्होंने यूक्रेन पर हमले को लेकर अमेरिकी पक्ष रखा। 

अमेरिकी दल को रोम में चीनी अधिकारियों व राजनयिकों के साथ मुलाकात की संभावना कम थी। बाइडन प्रशासन के एक अधिकारी ने इस मुलाकात के बाद कहा कि सात घंटे की गहन चर्चा से अंदाज लगाया जा सकता है कि कितना नाजुक दौर चल रहा है। यह संवाद जारी रखने की हमारी वचनबद्धता को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक किसी विशेष मुद्दे ना नतीजों को लेकर नहीं थी, बल्कि सीधे संवाद का प्रयास थी। 
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यह पूछने पर कि क्या यह सफल रही? बाडइन प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सफलता को कैसे परिभाषित करते हैं? हम मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच संवाद की रास्ता खुला रखना महत्वपूर्ण है। असहमति वाले विषयों पर चर्चा जारी रखना खासतौर से जरूरी है। 

हालांकि अमेरिकी अधिकारी रोम से निराश होकर लौट गए हैं, उन्हें कम उम्मीद है कि चीन की  सरकार मॉस्को के समर्थन को लेकर अपने फैसले में बदलाव करेगी। बाइडन प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि यहां मुख्य बात यह है कि चीन को मौजूदा हालात में अपनी स्थिति के पुन: आकलन के लिए कैसे राजी किया जाए? हमें तो इसकी कोई संभावना नजर नहीं आती है। 

एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि चीन फैसला कर चुका है कि वह रूस को आर्थिक व सैन्य सहायता करेगा। अब सवाल यह है कि क्या वह इससे भी आगे बढ़कर रूस की मदद करेगा? 

नहीं है कोई साझा तंत्र, मदद भेजना आसान नहीं
चीन से मंगाए जाने वाले सैन्य सामान में हथियारों से लैस ड्रोम अहम व कई तरह की गोलाबारूद शामिल है, लेकिन कोई भी सैन्य सहायता सीधे नहीं पहुंचाई जा सकती है। दोनों पक्ष जानते हैं कि उनके बीच कोई साझा प्रणाली नहीं है, इसलिए यह मदद भेजना भी आसान नहीं है।  रूस चीन से राशन के पैक भी मांग रहा है। इससे पता चलता है कि रूस को जंग लंबी खींचने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लड़ाई जितनी लंबी चलेगी रूस की समस्या उतनी बढ़ती जाएगी। 

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