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China Covid Protests: जन प्रदर्शनों ने शी जिनपिंग को झुकाया, जीरो कोविड नीति बदलने के संकेत

Tue, 29 Nov 2022 03:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

China Covid Protests: विश्लेषकों के मुताबिक अभी खड़ी हुई इस समस्या का असल कारण बीते दो वर्ष में कोविड पर काबू पाने में चीन की नाकामी है। इसके लिए चीन में बनी कोविड वैक्सीन की कमजोरी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है...
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China Covid Protests: चीन में प्रदर्शन - फोटो : सोशल मीडिया
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चीन के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब संकेत हैं कि कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार अपनी कोविड-19 नियंत्रण नीति में बड़े बदलाव की घोषणा करने वाली है। नई नीति में संक्रमण के रोकथाम से ज्यादा जोर संक्रमित मरीजों के इलाज पर दिया जाएगा।

वेबसाइट एशिया टाइम्स ने एक विशेष रिपोर्ट में बताया है कि बहुचर्चित जीरो कोविड में बदलाव के बारे में महीने भर से विचार किया जा रहा था। पिछले 11 नवंबर को कोविड नियंत्रण के नए 20 सूत्रीय उपाय घोषित किए गए थे। लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने उसके मुताबिक अपने तौर-तरीके नहीं बदले। उसका नतीजा अनेक शहरों में हुए प्रदर्शनों के रूप में सामने आया है। इसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार के लिए जीरो कोविड नीति में ठोस बदलाव प्राथमिकता बन गया है।   

एशिया टाइम्स की खबर के मुताबिक जनवरी की शुरुआत से कोविड नियंत्रण की नीति में और ढील दी जाएगी। उस समय सरकार एलान करेगी कि महामारी खत्म हो गई है और अब कोविड सिर्फ आम संक्रामक बीमारी के रूप में मौजूद है। इसके साथ ही स्थानीय और राज्यों के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिन्होंने 20 सूत्रीय नए उपायों को लागू करने में कोताही दिखाई थी। वैसे कुछ सूत्रों ने कहा है कि बीते दिनों में नए संक्रमण के मामलों में तेज उछाल भी एक कारण रहा, जिससे अधिकारियों ने 20 सूत्री उपायों के मुताबिक ढिलाई नहीं बरती।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक लॉकडाउन और खास इलाकों में सबकी कोविड जांच करने की नीति के खिलाफ स्थानीय स्तरों पर प्रदर्शन बीते कई दिनों से जारी थे। लेकिन शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमची में बहुमंजिली इमारत में आग लगने की घटना (जिस में 10 लोगों की जान गई) के बाद इन प्रदर्शनों ने व्यापक रूप ले लिया। खास कर बीजिंग स्थित सिंगहुआ यूनिवर्सिटी जैसे खास संस्थान में विरोध प्रदर्शन होने की घटना ने कम्युनिस्ट पार्टी नेतृत्व को चिंतित किया है। पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों में इन प्रदर्शनों को 1989 में बीजिंग पर तियानानमेन चौराहे छात्रों के लगे जमावड़े के बाद का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक अभी खड़ी हुई इस समस्या का असल कारण बीते दो वर्ष में कोविड पर काबू पाने में चीन की नाकामी है। इसके लिए चीन में बनी कोविड वैक्सीन की कमजोरी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बताया जाता है कि ये वैक्सीन शुरुआती कोविड-19 वायरस से बचाव में तो सक्षम साबित हुए, लेकिन बाद में इसके जो स्ट्रेन और वैरिएंट आए, उनसे बचाव में ये अप्रभावी रहे। इसलिए अब ये चर्चा है कि चीन सरकार अपने देश के अंदर विदेश में बनी वैक्सीन के इस्तेमाल की इजाजत दे सकती है।

एशिया टाइम्स के मुताबिक चीन सरकार इस बारे में पहले से विचार कर रही थी। इस महीने के आरंभ में जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज की चीन यात्रा के दौरान उनके साथ बीजिंग आए 12 कंपनियों के सीईओ में बायोएऩटेक वैक्सीन की निर्माता कंपनी के सीईओ उगुर सहीन भी थे। समझा जाता है कि उस दौरान वैक्सीन उत्पादन में जर्मनी और चीन के बीच सहयोग के बारे में बातचीत हुई थी। अब ये पहल तेजी से आगे बढ़ सकती है।

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