साल 2020 का था, जब दुनिया कोविड-19 की मार से बेहाल थी और भारत-चीन सीमा पर तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका था, उसी वक्त चीन ने बेहद गंभीर और चौंकाने वाली चाल चली। अमेरिका का दावा है कि गलवां झड़प के कुछ ही दिनों बाद चीन ने गुप्त तरीके से परमाणु परीक्षण किया। वैश्विक संकट की आड़ में की गई इस कथित चाल ने ड्रैगन की रणनीति और मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
2020 में जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी और दूसरी ओर गलवाल घाटी में भारत और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था। इसी दौरान तनाव की आड़ में चीन अपने नापाक मंसूबे को अंजाम देने की तैयारी में लगा हुआ था। आरोप है कि गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के कुछ ही दिनों बाद चीन ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किए। ये आरोप अमेरिका ने लगाए हैं। ऐसे में देखा जाए तो यह केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए भी गंभीर चेतावनी है। इतना ही नहीं ऐसे संवेदनशील समय में चीन की यह कथित गतिविधि उसकी मंशा और दीर्घकालिक रणनीति पर अहम सवाल भी खड़े करती है।
कब किया था चीन ने ये परीक्षण?
डिनैनो के मुताबिक, 22 जून 2020 को चीन ने ऐसा ही एक परमाणु परीक्षण किया था। यह तारीख इसलिए भी अहम है क्योंकि यह परीक्षण गलवां घाटी में भारत-चीन हिंसक झड़प के ठीक एक हफ्ते बाद हुआ था। गलवां संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, जबकि खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार 30 से ज्यादा चीनी सैनिक भी मारे गए थे।
उन्होंने कहा कि जहां अमेरिका के ज्यादातर परमाणु हथियार न्यू स्टार्ट के तहत सीमित थे, वहीं रूस और चीन पर इसका असर बेहद कम या न के बराबर रहा। अमेरिकी अधिकारी ने साफ कहा कि अब अमेरिका को अपने नागरिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए नई परमाणु नीति और नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जो आज के खतरों को ध्यान में रखे, न कि पुराने दौर की परिस्थितियों को।
ये भी पढ़ें:- Italy Olympic Protests: मिलान में ओलंपिक के खिलाफ भड़का जनआक्रोश, शांतिपूर्ण मार्च कैसे बना हिंसक प्रदर्शन?