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पुलवामा हमले की चीन ने की निंदा, पर अजहर मसूद के मुद्दे पर चुप्पी

Sat, 16 Feb 2019 08:50 PM IST
Nilesh Kumar भाषा, बीजिंग
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भारत चीन
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चीन के स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी ने कश्मीर में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले की निंदा करते हुए कहा कि बीजिंग सभी तरह के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और क्षेत्र के देशों को सहयोग बढ़ाना चाहिए और इससे उत्पन्न खतरे से संयुक्त रूप से निपटना चाहिए।

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में बृहस्पतिवार को जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन आतंकवादी ने 100 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक से लदी गाड़ी को सीआरपीएफ कर्मियों को ले जारी बस से भिड़ा दिया था जिसमें बल के 40 कर्मी शहीद हो गए।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को शुक्रवार को भेजे अपने शोक संदेश में यी ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि कश्मीर में एक फिदायीन हमला किया गया है और इससे भारी संख्या में सुरक्षा कर्मी हताहत हुए हैं तो वह स्तब्ध रह गए। शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, आतंकवाद मानवता का एक आम दुश्मन है। चीनी पक्ष दृढ़ता से सभी तरह के आतंकवाद का विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है।
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शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए यी ने कहा, क्षेत्र के देशों को सहयोग बढ़ाना चाहिए और संयुक्त रूप से आतंकवाद के खतरे से निपटना चाहिए और क्षेत्र की शांति एवं सुरक्षा को बनाए रखना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित पाकिस्तान स्थिति आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है।

भारत मांग करता आया है कि जैश के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में डाला जाए। अगर अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवादियों की सूची में डाला जाता है तो उसपर दुनिया भर में यात्रा करने पर रोक लगेगी और उसकी संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा।

यी का संदेश उसी दिन आया जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर गहरा दुख जताया था, लेकिन इस बात का कोई आश्वासन नहीं दिया था कि उनका देश अजहर को वैश्विक आतंकी की सूची में शामिल करने की भारत की अपील का समर्थन करेगा।

चीन के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार है और वह पाकिस्तान का करीबी सहयोगी है। चीन अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की राह में कई बार रोड़ा अटका चुका है। उसने पहले भारत के कदम पर रोड़ा अटकाया और फिर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की कोशिश को रोका।

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