China Communist Party Congress
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की हर पांच साल पर होने वाली कांग्रेस (महाधिवेशन) में इस बार बाहरी देशों की कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी देखी जा रही है। पश्चिमी मीडिया में इसका व्यापक कवरेज देखने को मिल रहा है। समझा जाता है कि इस आयोजन से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की भविष्य की दिशा का अंदाजा दुनिया को लगेगा।
सीपीसी की नेशनल कांग्रेस को बोलचाल में ‘पार्टी कांग्रेस’ के नाम से जाना जाता है। हफ्ते भर चलने वाले इस आयोजन में पार्टी के नए पदाधिकारी चुने जाते हैं। इस बार ये महाधिवेशन 16 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। इसमें 2,296 पार्टी प्रतिनिधि भाग लेंगे। उनमें बड़े राष्ट्रीय और प्रांतीय नेताओं के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरकर्मी, किसानों और मजदूरों के नुमाइंदे, जमीनी कार्यकर्ता आदि शामिल हैं। इस बार लगभग एक चौथाई प्रतिनिधि महिलाएं हैं। 11 फीसदी प्रतिनिधि नस्लीय अल्पसंख्यक समुदायों से चुने गए हैं।
इन प्रतिनिधियों में सीपीसी की सेंट्रल कमेटी के लगभग 400 सदस्य भी शामिल हैं। यानी 25 सदस्यीय पोलित ब्यूरो के सदस्य भी इन 400 सदस्यों में शामिल हैं। समझा जाता है कि चीन में सत्ता की असली कमान पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्यों के हाथ में होती है, जिनका चयन पोलित ब्यूरो के बीच से किया जाता है। फिलहाल स्थायी समिति में नौ सदस्य हैं।
इस बात की पूरी संभावना है कि शी जिनपिंग को फिर से पार्टी महासचिव चुन लिया जाएगा। चीन में सीपीसी के महासचिव ही सबसे अधिक शक्तिशाली होता है। महासचिव ही राष्ट्रपति का पद भी संभालते हैं। हालांकि महासचिव और सेंट्रल कमेटी का चुनाव कांग्रेस में होता है, लेकिन पर्यवेक्षकों की राय में ये चुनाव पहले ही पार्टी की अंदरूनी प्रक्रिया के जरिए हो चुका होता है। पार्टी कांग्रेस में उस चुनाव पर सिर्फ मुहर लगाई जाती है।
कांग्रेस के दौरान वहां आए प्रतिनिधि नई मतदान के जरिए नई सेंट्रल कमेटी का चुनाव करेंगे। सेंट्रल कमेटी में लगभग 200 पूर्ण सदस्य और इतने ही वैकल्पिक सदस्य होते हैं। सेंट्रल कमेटी के लिए निर्वाचित सदस्य पोलित ब्यूरो का चुनाव करेंगे। इसके लिए सेंट्रल कमेटी की बैठक पार्टी कांग्रेस के पूरा होने के तुरंत बाद होगी। उसमें पोलित ब्यूरो का चुनाव होगा।
परंपरा यह है कि सेंट्रल कमेटी की बैठक में चुनाव होने के बाद पोलित ब्यूरो के सदस्य वरिष्ठता के क्रम में चलते हुए बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में प्रवेश करते हैं। जानकारों के मुताबिक सदस्यों के इसी क्रम को देख कर अंदाजा लग जाता है कि पोलित ब्यूरो की बैठक में किसे क्या जिम्मेदारी दी जाने वाली है। मसलन, शी जिनपिंग अगर सबसे आगे चलते नजर आए, तो समझा जाएगा कि उन्हें फिर से महासचिव चुनने का फैसला हो गया है।
चीन में दो दशक तक यह परंपरा रही कि हर दस साल पर नया महासचिव चुना जाता था। लेकिन ये चर्चा आम है कि इस बार उस परंपरा को तोड़ कर शी जिनपिंग को तीसरे कार्यकाल के लिए महासचिव चुना जाएगा। ऐसा हुआ, तो उससे यह संदेश जाएगा कि अब 69 वर्षीय शी ने सीपीसी पर अपना पूरा वर्चस्व कायम कर लिया है। हालिया परंपरा इतनी उम्र के नेताओं को रिटायर्ड कर देने की रही है।