एक तरफ रूस की बनाई कोविड-19 की वैक्सीन स्पूतनिक वी का पहला बैच अगले दो हफ्ते में बाजार में आ जाएगा, तो दूसरी तरफ चीन भी तेजी से अपने यहां बन रही वैक्सीन को जल्दी से जल्दी दुनिया के सामने लाने की कोशिश में लगा है।
चीन बार बार ये श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है कि वह दुनिया का पहला देश है जिसने कोविड-19 की वैक्सीन बनाई। साथ ही इस काम में उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की मेडिकल टीम जनवरी से ही लगी है। अब वहां बन रही वैक्सीन के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल हो रहा है।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के मेजर जनरल शेन वी के नेतृत्व में बन रही इस वैक्सीन को लेकर चीन दावा कर रहा है कि उसने रूस या दुनिया के किसी भी देश से पहले कोविड-19 की वैक्सीन बना ली थी और इसका क्लिनिकल ट्रायल 16 मार्च को ही हो गया था। इसके क्लिनिकल ट्रायल का दूसरा चरण 12 अप्रैल को ही पूरा हो गया था।
चीन का दावा है कि उसने वुहान के हुबेई में 26 जनवरी से ही कोविड-19 की टेस्टिंग का काम शुरू कर दिया था। इसके लिए वुहान में टेस्टिंग लैब बनाने की शुरुआत हो गई थी और अब जल्दी ही इस लैब में रोज एक हजार लोगों की जांच हो सकेगी।
जब से रूस में तैयार वैक्सीन की खबरें आनी शुरू हुई हैं, चीन ये साबित करने में लगा है कि जो काम रूस अब कर रहा है, वह उसने अप्रैल में ही कर लिया था। इसके लिए वह विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला भी देता है और कहता है कि अप्रैल में हुए क्लिनिकल ट्रायल को डब्लूएचओ ने दुनिया में पहला ट्रायल माना था।
इसके लिए चीनी विशेषज्ञों ने काफी रिसर्च की और दिन रात जुटे रहे। दरअसल, क्लिनिकल ट्रायल के लिए भी पहले बहुत सारी रिसर्च की जाती है ताकि इसका कोई खराब नतीजा न निकले। इसलिए तीसरे चरण के ट्रायल में इतना वक्त लगा।
कोविड-19 को लेकर हुए रिसर्च और इससे बचाव को लेकर दवाइयां और वैक्सीन बनाने के काम में बेहद अहम भूमिका निभाने वाली शेन वी को दो दिन पहले ही वहां ‘पीपुल्स हीरो’ का नागरिक सम्मान मिला है। वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की जानकारी देते हुए शेन ने बताया कि इसके बाद ये वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।