अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वीटो कर खारिज किए गए 740 अरब डॉलर के रक्षा विधेयक पर अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। प्रतिनिधि सभा के बाद सीनेट (उच्च सदन) ने भी ट्रंप के वीटो को खारिज करते हुए उनकी आपत्तियां दरकिनार कर दीं। इस बिल में भारत के प्रति चीन के आक्रामक रुख की निंदा की गई थी। अब यह विधेयक अमेरिका में कानून का रूप ले चुका है।
बता दें कि सीनेट में ट्रंप की पार्टी (रिपब्लिकन) का ही बहुमत है और उसने भी इस विधेयक पर राष्ट्रपति के कार्यकाल के अंतिम दिनों में उन्हें बड़ा झटका दिया है। यह विधेयक भारत के लिए इसलिए अहम रहा है क्योंकि इसमें अन्य कई चीजों के साथ भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सरकार द्वारा भारत के खिलाफ उठाए गए कदमों की आलोचना को शामिल किया गया है।
अमेरिका में कानून की शक्ल ले चुके ‘नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट’ (एनडीएए) बिल को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों का समर्थन हासिल है। इसमें एक ऐसा भी प्रस्ताव है जिसमें चीन सरकार से अपील की गई है कि वह एलएसी पर भारत के प्रति सैन्य आक्रामक रुख को खत्म करे। दोनों सदनों से पूर्व में पारित हो चुके इस बिल को ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताते हुए वीटो किया था।
बिल में चीन को लेकर शामिल हुए राजा कृष्णमूर्ति के प्रस्ताव
अमेरिकी रक्षा नीति कानून (एनडीएए) में चीन को लेकर भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति के प्रस्ताव शामिल किए गए थे। कृष्णमूर्ति ने इसके कानून बनने पर कहा, बिल में चीन से भारत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आक्रामक रुख खत्म करने के लिए कहा गया है। चीन का यह रुख कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है। इस कानून में अंकित बातें भारत और दुनिया के अन्य सहयोगियों को नव वर्ष में प्रवेश के साथ समर्थन और एकजुटता का संदेश देती हैं। अब कानून बन चुके इस बिल में चीन से इस विवाद को निपटाने के लिए बल प्रयोग की कोशिश से बचने को कहा गया है।
कार्यकाल के अंतिम दिनों में ट्रंप को ऐसे लगा झटका
अमेरिकी कांग्रेस ने रक्षा नीति विधेयक पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वीटो को उच्च सदन (सीनेट) ने 13 के मुकाबले 81 मतों से खारिज करके उनके कार्यकाल के अंतिम दिनों में बड़ा झटका दिया। सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी से बहुमत के नेता मिच मैक्कोनल ने मतदान पूर्व कहा कि कांग्रेस 59 वर्षों से हर साल एनडीएए बिल पारित करती आई है। ऐसे में किसी भी रास्ते से हम 60वां वार्षिक एनडीएए भी पूरा करेंगे। इसके बाद मतदान हुआ। ट्रंप के हस्ताक्षर के बिना विधेयक के कानून बनने के लिए हर चैम्बर में दो-तिहाई मत जरूरी होते हैं और यह उसने हासिल कर लिया। इसमें ट्रंप के दस्तखत के बिना ही अमेरिकी सैनिकों के वेतन में तीन फीसदी वृद्धि, सैनिकों की संख्या, नई हथियार प्रणाली और सैन्यकर्मियों से जुड़ी नीतियों से जुड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई है।
ट्रंप ने वोटिंग को शर्मनाक बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने वीटो की अवहेलना करते हुए हुई इस वोटिंग को ‘कायरतापूर्ण शर्मनाक कार्य’ करार दिया। ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में ही ट्विटर पर रिपब्लिकन सांसदों पर गुस्सा निकाला था। उन्होंने कहा था कि ‘रिपब्लिकन पार्टी का थका हुआ और कमजोर नेतृत्व’ खराब रक्षा विधेयक को पारित होने देगा।