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G20 Summit: जी-20 सम्मेलन को चीन और इंडोनेशिया ने बनाया बीआरआई के प्रचार का मौका

Thu, 17 Nov 2022 06:38 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता

सार

G20 Summit: शिखर सम्मेलन से समय निकाल कर शी जिनपिंग और जोको विडोडो दोनों राष्ट्रपतियों ने जकार्ता-बांडुंग रेल मार्ग पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती ट्रेन को देखने गए। इंडोनेशिया में बीआरआई का उद्घाटन 2013 में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान हुआ था
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G20 Summit 2022: Xi Jinping and Joko Widodo - फोटो : Agency
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विस्तार
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इंडोनेशिया में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के कारण इस देश में जारी चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना पर दुनिया का ध्यान गया है। बुधवार को ये परियोजना और चर्चा में आई, जब शिखर सम्मेलन से समय निकाल कर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो जकार्ता-बांडुंग फास्ट रेलवे ट्रैक को देखने गए। ये रेल मार्ग चीन के पैसे से बना है।

चीन इंडोनेशिया में बीआरआई से जुड़ी परियोजनाओं के लिए दो बिलियन डॉलर से अधिक रकम मंजूर कर चुका है। लेकिन जकार्ता-बांडुंग रेलवे सहित कई अन्य परियोजनाओं पर काम पूरा करने में देर हुई है। इस कारण इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर लगातार सवाल उठाए गए हैं। यहां शी और जोको विडोडो के रेलवे परियोजना को देखने जाने को इससे ही जोड़ कर देखा गया है। समझा जाता है कि दोनों राष्ट्रपतियों ने इस संबंध में उठे अंदेशों को दूर करने की कोशिश में ये बहु-प्रचारित यात्रा की।

दोनों राष्ट्रपतियों ने इस रेल मार्ग पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलते देखी। जबकि आरंभ में बताया गया था कि इस रेल मार्ग पर 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगी। इंडोनेशिया में बीआरआई का उद्घाटन 2013 में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान हुआ था। उसके बाद के नौ वर्षों में दोनों देशों के संबंध तेजी से आगे बढ़े हैं। चीन ने इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इंडोनेशिया में निकेल के समृद्ध भंडार हैं। जिस समय दुनिया में इलेक्ट्रिक बैटरी का चलन बढ़ रहा है, ये धातु काफी अहम हो गई है। समझा जाता है कि इस पर ही चीन की नजर है।

लेकिन बीआरआई की परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण और तकनीकी समस्याओं के कारण उस तेजी से आगे नहीं बढ़ी हैं, जिसका अनुमान पहले लगाया गया था। कोरोना महामारी के कारण भी इनकी रफ्तार पर फर्क पड़ा है। मगर शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान इंडोनेशिया सरकार ने इन समस्याओं को परदे के पीछे रखने की कोशिश की। इंडोनिशाई अखबारों ने इस मौके पर बड़ी सुर्खियों दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की खबर छापी।

विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की योजना अपने शहर कुनमिंग से सिंगापुर तक 3,900 किलोमीटर की फास्ट रेल लाइन बिछाने की है। लेकिन थाईलैंड और मलेशिया के अभी तक इसके लिए राजी ना होने की वजह से इस योजना पर काम आगे नहीं बढ़ा है। जबकि इंडोनेशिया इस प्रोजेक्ट में शामिल हो चुका है। वहां सघन जंगलों से गुजरते हुए बुलेट ट्रेन की पटरी बिछाई जा रही है। वहां बुलेट ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से चलेगी।

शी जिनपिंग अपने दल-बल के साथ इंडोनेशिया से थाईलैंड के लिए रवाना हो गए हैं। वहां वे एशिया-पैसिफिक इकॉनमिक को-ऑपरेशन (एपेक) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। लेकिन पर्यवेक्षकों की मुताबिक उनकी निगाह बीआरआई से संबंधित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी रहेगी। वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन वर्षों से थाईलैंड पर रेल लिंक परियोजना में शामिल होने के लिए दबाव डाल रहा है।

मलेशिया बीआरआई में शामिल हो चुका है, जिसके तहत वहां 12 बिलियन डॉलर के खर्च से ईस्ट कॉस्ट रेल लिंक (ईसीआरएल) का निर्माण हो रहा है। लेकिन कई देशों से गुजरने वाली रेल पटरी को लेकर अभी वह सहमत नहीं हुआ है। विश्लेषकों के मुताबिक मलेशिया में अभी चुनाव का माहौल है। उसके बाद चीन उसकी सहमति पाने के लिए वहां अपनी कूटनीतिक गतिविधियां फिर तेज कर सकता है।

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