एक तरफ सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता के दौरान भारत और चीन मई से पहले के हालात बहाल करने और अपनी सेनाओं को पीछे हटाने पर राजी होने का दावा कर रहे हैं, दूसरी तरफ चीन का रक्षा मंत्रालय आरोप लगा रहा है कि भारतीय सैनिकों ने लगातार समझौते का उल्लंघन किया है और 15 जून की रात गलवां घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों के लिए पूरी तरह भारत जिम्मेदार है।
चीन का कहना है कि सीमा पर जो कुछ भी हुआ उसके लिए जिम्मेदार सैनिकों को भारत को कड़ी सजा देनी चाहिए। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सीनियर कर्नल वू क्वियान ने गलवान घाटी पर चीन का दावा जताते हुए फिर कहा है कि चीनी सेना इस इलाके में वर्षों से पेट्रोलिंग करती आ रही है।
वू का आरोप है कि भारत ने अप्रैल से भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा में स्थित गलवां घाटी में अपने ठिकाने बनाना शुरू कर दिए, जिसके बारे में चीन ने कई बार भारत से शिकायत की थी और इसपर अपना विरोघ दर्ज कराया था।
चीन का आरोप है कि 6 मई को भारतीय सेना ने चीनी नियंत्रण वाले क्षेत्र में जबरन घुसने की कोशिश की और यथास्थिति को बदलने की कोशिश की। इसका विरोध चीन ने किया।
इस टकराव की स्थिति को रोकने के लिए सैन्यस्तर की वार्ता का फैसला हुआ और 6 जून को पहली बार बातचीत के दौरान भी दोनों देशों ने यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति जताई।
भारत ने वादा किया कि उसके सैनिक गलवां नदी को पार नहीं करेंगे। यह भी तय हुआ कि कुछ चरणों में दोनों देश अपने अपने सैनिकों को पीछे ले जाएंगे।
लेकिन 15 जून की रात फिर भारतीय सेना की अगली कतार के सैनिकों ने समझौते का उल्लंघन किया और चीनी सीमा में आकर चीनी सैनिकों को भड़काने की कोशिश की जिसकी वजह से कई जानें चली गईं।
वू ने कहा है कि भारत को इस घटना के लिए पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि 15 जून के संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी और भारत के विदेश मंत्री एस जशंकर ने फोन पर बात करने के बाद ये सहमति बनाई है कि दोनों देश इस मसले का हल निकालेंगे और यथास्थिति बनाए रखेंगे।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और चीन मिलकर इस समस्या को हल कर लेंगे और आने वाले दिनों में भी दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर बने रहेंगे।