चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा ने पूरी कैबिनेट को निलंबित कर दिया है। राष्ट्रपति पिन्येरा ने नई सरकार के गठन का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ने सामाजिक सुधार को लागू करने की बात कही है, जिसकी मांग चिली में प्रदर्शनकारी कर रहे हैं।
सैंटियागो की गवर्नर कार्ला रुबिलार ने कहा है कि शुक्रवार के विरोध-प्रदर्शन में कम से कम दस लाख लोग शामिल हुए। यह संख्या चिली की कुल आबादी का पाँच प्रतिशत है। ट्विटर पर गवर्नर ने लिखा है, ''प्रदर्शनकारी एक नए चिली का सपना संजोए हैं।'' वहीं इस प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि 1990 में चिली में लोकतंत्र बहाल होने के बाद से यह सबसे बड़ा प्रदर्शन था।
प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोग मिलों पैदल चले। इस दौरान इनके हाथों में बर्तन थे और बजाते हुए आगे बढ़ रहे थे। झंडे लहरा रहे थे और सुधार की मांग कर रहे थे। चिली के बाक़ी शहरों में भी प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे। समाचार एजेंसी एएफपी से सैंटियागो में 38 साल के फ्रांसिस्को ने कहा, ''हम लोग इंसाफ की मांग रहे हैं। हम ईमानदार सरकार की मांग कर रहे हैं।''
चिली में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो के किराए बढ़ने से हुई थी। लेकिन यही विरोध-प्रदर्शन सरकार से कई नाराजगियों और बढ़ती गैरबराबरी को लेकर व्यापक हो गया। लोग बढ़ती महंगाई से तो खफा थे ही लेकिन तात्कालिक कारण लंबे समय से पल रहे असंतोष को सड़क पर लाने में कामयाब रहा।
पिछले एक हफ्ते में चिली में काफी उठापटक की स्थिति रही। सात हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया। सैंटियागो की सुरक्षा को वहां की सेना ने अपने हाथों में ले लिया। आपातकाल जैसी स्थिति बन गई और हजारों पुलिस बल सड़कों पर तैनात कर दिए गए।
चिली लातिन अमेरिका का धनी देश रहा है लेकिन इसके साथ ही यहां भयानक गैर-बराबरी है। ऑर्गेनाइजेशन फोर इकनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यानी ओईसीडी के कुल 36 सदस्य देशों में चिली एक ऐसा देश है जहां आय में असमानता बहुत गहरी है। बुधवार को राष्ट्रपति ने प्रदर्शन को खत्म करने के लिए एक सुधार पैकेज की घोषणा की थी। इसमें बुनियादी पेंशन और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की बात थी।