स्कॉटलैंड के एक एंटीक डीलर ने 1964 में जब 5 पाउंड यानी 439 रुपए देकर एक शतरंज का मोहरा खरीदा था, तब उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह मोहरा उनके ही खेल को पलट कर रख देगा। डीलर को आश्चर्य तब हुआ जब उसे पता चला कि महज पांच पाउंड में खरीदे गए मोहरे की कीमत अब 1 मिलियन पाउंड यानी 8.7 करोड़ रुपए हो गई है। डीलर ने सोचा भी नहीं था कि एक सामान्य सा मोहरा इतना कीमती होगा।
यह मोहरा हाथी दांत से बना हुआ है, जिसे लुईस वार्डर के नाम से जाना जाता है। डीलर के खरीदने के बाद यह मोहरा 55 साल तक एक दराज में पड़ा रहा। हाल में इसे सोदबी ऑक्शन हाउस लाया गया। जहां इसकी बोली एक मिलियन पाउंड तक लग चुकी है। इसे दो जुलाई को नीलाम किया जाएगा।
दरअसल लंदन में 12वीं शताब्दी के आखिर में लुईस चैसमैन नाम से कुछ कीमती शतरंज के मोहरे बनाए गए थे। 1831 में ऐसे 93 मोहरे स्कॉटलैंड के लुईस टापू पर मिले थे। इनमें से 82 लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम और 11 एडिनबर्ग में रखे हुए हैं। इस सेट में पांच मोहरे गुम बताए जाते रहे हैं। इनमें एक नाइट यानी घोड़ा और पांच वार्डर यानी जेलर हैं। यह मोहरा उन्हीं खोए हुए मोहरों में से एक है।