वैश्विक महामारी कोरोना की विभीषिका को देखते हुए भारत ने दुनिया के देशों से कहा है कि भविष्य में ऐसी किसी महामारी से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति और रोडमैप तैयार करना होगा।
साथ ही कहा कि किफायती दवा, बीमारी की जांच और तकनीकी तक सभी की समान रूप से पहुंच बहुत बड़ी बाधा है। दुनिया के देशों को इन बाधाओं को दूर करना होगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में काउंसलर प्रतीक माथुर ने कहा है कि भारत ने स्वास्थ्य पर समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, जो मुख्य रूप से चार स्तंभों- बीमारी से बचाव, सस्ती चिकित्सा सुविधा, आपूर्ति में सुधार और आपात स्थिति में मिशन मोड में हस्तक्षेप पर आधारित है।
यूएनजीए में ‘विश्व स्वास्थ्य और विदेश नीति’ पर भारत का पक्ष रखते हुए माथुर ने कहा कि स्वस्थ जीवन हर इंसान का मूलभूत अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी सरकारों पर है।
स्वास्थ्य सुरक्षा पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत ने जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह, रक्तचाप, अत्यधिक तनाव और अवसाद पर नियंत्रण के लिए योग, आयुर्वेद और तंदुरुस्ती पर विशेष बल दिया है। उन्होंने भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के बारे में भी विस्तार से बताया।