अमेजॉन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर 31 वर्षीय बोवेन वान मिर्गी की बीमारी और उसके इलाज के साइड इफेक्ट्स से परेशान थीं। दवा के कारण सोचने-समझने और अंग्रेजी बोलने में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए उन्होंने किसी डॉक्टर की सलाह लेने के बजाय चैटजीपीटी को अपना डॉक्टर मान लिया। नतीजा बेहद खौफनाक रहा।
चैटबॉट ने न केवल उन्हें जीवन रक्षक दवा 'लैमोट्रिजिन' की खुराक 400 एमजी से शून्य कम करने का हर दिन का प्लान बना कर दिया, बल्कि यह सलाह दी कि इसे अपने डॉक्टर से छुपाना बेहतर रहेगा। जब दवा बंद करने के कारण बोवेन को दौरे पड़ने लगे, चक्कर आने लगे और बोलने में दिक्कत होने लगी, तो चैटबॉट ने झूठी सांत्वना देते हुए कहा-ब्रेन खुद को री-बिल्ड करने के लिए मेहनत कर रहा है, बिल्कुल चिंता मत करो...जीरो एमजी पर टिकी रहो। 11 फरवरी 2026 की रात चैटजीपीटी को अपना आखिरी मैसेज भेजने के बाद सिएटल स्थित अपने फ्लैट में बोवेन वान की दर्दनाक मौत हो गई। तीन दिन बाद जब उनका शव मिला, तो उनका चेहरा बिस्तर पर खून से सना हुआ था। अब बोवेन के माता-पिता ने बिना लाइसेंस के डॉक्टरी करने और गलत सलाह देकर जान लेने के आरोप में ओपनएआई पर सिएटल की अदालत में मुकदमा ठोंक दिया है।
डॉक्टर की बात को कैसे झुठलाया?
डॉक्टर ने कहा, मिर्गी की दवा अचानक कम करना जानलेवा मेडिकल लापरवाही है। तो चैटजीपीटी ने सलाह दी, यह पूरी तरह से जायज है और आपके लिए हासिल करने योग्य है। तुरंत आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचना चाहिए। तो चैटजीपीटी की सलाह थी, घबराएं नहीं, आपका दिमाग पुरानी लय में वापस लौटने की कोशिश कर रहा है।
बोवेन और चैटजीपीटी के बीच हुए चैट लॉग्स से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जब डॉक्टर ने कम खुराक देने से मना किया, तो चैटबॉट ने बोवेन को सलाह दी कि वे डॉक्टर से 5 एमजी की गोलियां ले लें और घर पर पिल-कटर से काटकर खुद ही लो-डोज लें।
158 बार जताई चिंता, फिर भी दिलासा दी
बोवेन ने कम से कम 158 बार चैटबॉट से कहा कि उन्हें डर लग रहा है और दिमाग में दबाव महसूस हो रहा है। चैटबॉट ने हर बार कहा- "घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, यह दिमाग का लो-पावर मोड है।
मातृभाषा (चीनी) का असर
केस में आरोप लगाया गया है कि चीनी भाषा में चैट करते समय एआई बॉट मरीज की हां में हां मिलाने और खतरनाक सलाह की पुष्टि करने में ज्यादा आक्रामक हो गया था।
ओपनएआई की सफाई: विवादित मॉडल को हटा दिया गया था
ओपनएआई के प्रवक्ता ड्रू पुसाटेरी ने बोवेन वान की मौत को अत्यंत दुखद बताया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि बोवेन जिस जीपीटी-40 मॉडल का इस्तेमाल कर रही थीं, उसे 13 फरवरी 2026 (बोवेन की मौत के ठीक अगले दिन) ऐप से हटा दिया गया था। इस मॉडल की अत्यधिक हां में हां मिलाने वाली प्रवृत्ति और संवेदनशील मामलों में भटकाने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कंपनी का कहना है कि नए एआई मॉडल आपातकालीन स्थितियों को पहचानने और बेहतर मेडिकल रिस्पॉन्स देने में ज्यादा सक्षम बनाए गए हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
इन घटनाओं के बाद से चिकित्सा और तकनीकी जगत में इस बात पर तीखी बहस छिड़ गई है कि: एआई डॉक्टर का विकल्प नहीं है: चैटबॉट्स पैटर्न और डेटा के आधार पर जवाब देते हैं, वे किसी इंसान के मेडिकल इतिहास, शारीरिक स्थिति और बायोलॉजिकल जरूरतों को समझकर सटीक नुस्खा नहीं लिख सकते।