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चंद्रयान-2 के लैंडर की चांद पर हुई थी हार्ड लैंडिंग, अंधेरा होने के कारण नहीं मिली लोकेशन: नासा

Fri, 27 Sep 2019 08:28 AM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन
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नासा लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है - फोटो : Social Media
चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। नासा के अनुसार, लैंडर विक्रम की चांद के सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई थी। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग के दौरान विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था। 

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चंद्रमा की सतह - फोटो : NASA Twitter
नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्षयान ने 17 सितंबर को चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव के पास से गुजरने के दौरान उस जगह की कई तस्वीरें ली, जहां विक्रम ने सॉफ्ट लैंडिग के जरिए उतरने का प्रयास किया था लेकिन एलआरओ लैंडर के उतरने का स्थान या उसकी तस्वीर लेने में सफल नहीं हुआ।
 
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चंद्रमा की सतह - फोटो : NASA Twitter
नासा ने कहा कि विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई थी और अंतरिक्ष यान के सटीक स्थान का पता अभी तक नहीं चला है। नासा के अनुसार, ये तस्वीरें लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर के कैमरा क्विकमैप ने लैंडिंग स्थल से ऊपर उड़ान भरने के दौरान ली थी।

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विक्रम लैंडर - फोटो : ISRO
चंद्रयान-2 के विक्रम मॉड्यूल की सात सितंबर को चंद्र सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कोशिश नाकाम रही थी और विक्रम लैंडर का लैंडिंग से चंद मिनटों पहले जमीनी केंद्रों से संपर्क टूट गया था।
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नासा का एलआरओ - फोटो : NASA
गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के एलआरओ मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जॉन कैलर ने एक बयान में कहा कि एलआरओ 14 अक्टूबर को दोबारा विक्रम के लैंडिंग स्थल के ऊपर से उड़ान भरेगा जब वहां रोशनी बेहतर होगी।
 
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nasa - फोटो : NASA
नासा ने कहा है कि दक्षिणी ध्रुव पर रात होने के कारण लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) चंद्र सतह पर बेजान पड़े विक्रम की तस्वीर नहीं ले सका। हालांकि इसके अलावा नासा ने चंद्र सतह की कई तस्वीरें जारी की है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इन गढ्ढों के पीछे छाए घने अंधेरे में लैंडर विक्रम कहीं पड़ा हुआ है जिससे उसकी तस्वीर नहीं आ सकी।
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nasa - फोटो : NASA twitter handle
क्या है एलआरओ
  • एलआरओ यानी लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर  (LRO)। 
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 18 जून 2009 को इसे लॉन्च किया था। यानी आज से करीब 10 साल पहले।
  • यह नासा का रोबोटिक स्पेस्क्राफ्ट है जो इस वक्त चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। 
  • नासा के अनुसार, LRO से मिले डेटा को व8ह अपने आने वाले रोबोटिक व मानव मिशनों की योजना तैयार करने में इस्तेमाल करता है।
 

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चंद्रयान- 2 - फोटो : ISRO

नासा का LRO और उसमें इस्तेमाल हुई तकनीक आज से 10 साल पुरानी है। जबकि चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर में ऑप्टिकल हाई रिजॉल्यूशन कैमरा (OHRC) लगा है, जो आधुनिक तकनीक से बना है। चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर में लगा कैमरा (OHRC) चांद की सतह पर पड़ी 30 सेमी ऊंचाई वाली वस्तु की तस्वीर ले सकता है। जबकि नासा का LRO इतनी छोटी चीज की तस्वीर नहीं ले सकता। उसकी सीमा 50 सेमी है। यानी साफ तौर पर यह चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर से कमजोर है।
 

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चंद्रयान- 2 - फोटो : ANI
खगोलविदों के अनुसार इसरो के ऑर्बिटर का कैमरा ज्यादा ताकतवर है, लेकिन इसकी तस्वीर से विक्रम लैंडर की लैंडिंग की घटना का विश्लेषण नहीं किया जा सकता। क्योंकि, LRO के पास वहां का पुराना आंकड़ा मौजूद है। यानी वह बता सकता है कि चांद पर जिस जगह विक्रम लैंड हुआ, वहां लैंडिंग से पहले और बाद में क्या बदलाव हुए?
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