जेल में बंद आर्ट डीलर सुभाष कपूर पर मैनहट्टन के अभियोजकों ने करोड़ों रुपये मूल्य की कलाकृतियां चुराने और रखने का आरोप लगाया है। अब मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या कपूर ने उनके संग्रहालय को चुराई गई कलाकृतियां बेची हैं।
कपूर को इंटरपोल ने 2011 में जर्मनी में गिरफ्तार किया था और वह भारत की जेल में बंद हैं।
मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी साइरस वांसे के कार्यालय ने पिछले महीने कपूर और कई अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कपूर पर चोरी की कलाकृतियां रखने, इनकी चोरी करने से लेकर धोखाधड़ी आदि का आरोप है।
बताया जा रहा है कि भारत सरकार के अधिकारी और मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि संग्रहालय करीब तीन दशक पहले से जो पुरानी बहुमूल्य कलाकृतियां हासिल करता आ रहा था क्या वह कपूर की कारगुजारियों वाली थीं ?
यूनेस्को का अनुमान है कि भारत से 50,000 से अधिक मूर्तियां, चिह्न, कलाकृतियां और पुरावशेष चुरा लिए गए हैं।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दशकों से मेट्रोपोलिटन म्यूजियम के पास एक नीति थी, जिसके अनुसार संग्रहालय में आने वाली कलाकृतियों का निर्यात और आयात लाइसेंस के साथ होना चाहिए जिससे यह पता चले कि वह अपने देश से कानूनी रूप में भेजी गई है।
हालांकि, कपूर ने कभी-कभी संग्रहालय क्यूरेटरों और अन्य खरीदारों को नकली लाइसेंस प्रदान किए। मेट्रोपोलिटन ने यह कहने से इनकार कर दिया कि क्या कपूर की वस्तुओं के अधिग्रहण के बाद उसे कोई लाइसेंस मिला था या नहीं।
कपूर की गिरफ्तारी के बाद से, कम से कम 10 अमेरिकी संग्रहालय, जिनमें टोलेडो म्यूजियम ऑफ आर्ट, होनोलुलु म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट और फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में सैमुअल पी हारन म्यूज़ियम शामिल हैं, ने कई ऐसे आइटमों को नष्ट कर दिया है, जो बिना किसी कारण के संग्रहालय वापस आ गए।