आईएटीए के विश्लेषण की मानें तो दंडात्मक यात्री करों के जरिए जानबूझकर हवाई यात्रा में कटौती से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयास नाकाफी हैं।वैश्विक दायरे में कोरसिया की स्कीम की प्रभावशीलता निहित है।
एक अनुमान के मुताबिक, इससे कार्बन उत्सर्जन में 2.5 अरब टन की कमी होगी। लेकिन स्कीम को लागू करने को लेकर सरकारों द्वारा कार्बन करों से समझौता किया जा रहा है।
हाल ही में जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड सहित कई देशों ने हवाई कर लेने का फैसला किया है। इससे लोगों को हवाई यात्रा करना काफी महंगा हो जाएगा, लेकिन कार्बन उत्सर्जन में मामूली अंतर आएगा।
स्वच्छ प्रौद्योगिकी होगी मददगार
आईएटीए के मुताबिक, कार्बन उत्सर्जन को कम करने में स्वच्छ प्रौद्योगिकी काफी मददगार साबित होगी। इसके लिए वित्तीय तौर पर मजबूत एयरलाइन क्षेत्र की जरूरत होगी, जो उड़ान को स्थायी बनाने के आवश्यक निवेश करने में सक्षम हो।
सरकारों को टिकाऊ विमानन ईंधन के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करने, हवाई यातायात प्रबंधन में दक्षता बढ़ाने और कार्बन ऊर्जा स्रोतों में अनुसंधान का समर्थन करने की आवश्यकता है।