वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (डब्ल्यूटीसी) पर सितंबर 2001 में हुए आतंकी हमले के बाद राहत कार्य में जुटे कर्मियों में कैंसर और ल्यूकेमिया जैसी बीमारी के मामले बढ़े हैं। एक अध्ययन में किए दावे के मुताबिक इन लोगों में थाईरॉयड और प्रोस्टेट कैंसर के मामले भी बढ़े हैं। हमले के बाद करीब 50 हजार कर्मी राहत कार्य में जुटे थे।
शोध के मुताबिक जून 2002 को पूरा मलवा साफ होने तक राहत कर्मी वहीं पर कार्यरत थे। इस कारण बहुत लंबे समय तक धूल और रसायनिक धुएं के बीच रहने का इन कर्मियों की सेहत पर बुरा असर हुआ। इसमें कई को कैंसर भी हुआ। जेएनसीआई कैंसर स्पेक्ट्रम में प्रकाशित शोध के मुताबिक कानून एजेंसियां, निर्माण और दूरसंचार कर्मियों को सबसे अधिक कैंसर हुआ।
हालांकि सभी कर्मियों में देखें तो सर्वाधिक को थाईरॉयड की शिकायत हुई। शोधार्थियों ने पाया कि घटनास्थल पर बेजनीन का उत्सर्जन हुआ जिससे ल्यूकेमिया के मामले बढ़े। शोध में यह भी दावा किया गया कि अधिक समय तक घटना स्थल पर रहने के बजाय कर्मियों की उम्र, लिंग और उनकी धूम्रपान की आदत का कैंसर के खतरे पर अधिक प्रभाव पड़ा था।
शोध में न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, कनेक्टीकट, पेंसिलवेनिया, फ्लोरिडा और उत्तर कैरोलिना से करीब 28,729 राहत कर्मियों के कैंसर मामलों का अध्ययन किया गया।