दुनिया भर में पचास साल या उससे अधिक उम्र के पुरुषों में समान उम्र की महिलाओं के मुकाबले मौत का खतरा अधिक होता है। 28 देशों के लोगों पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि इसके लिए आंशिक तौर पर पुरुषों में धूम्रपान की आदत और हृदय रोग जिम्मेवार हैं।
हालांकि कनेडियन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में छपे शोध में यह दावा किया गया है कि महिला और पुरुषों की मृत्यु दर में अंतर के कारण अलग-अलग देशों में अलग-अलग हैं।
किंग्स कॉलेज लंदन और न्यू कैशल यूनिवर्सिटी, यूके की विशेषज्ञ यू-जू वू ने कहा- सामाजिक, व्यावहारिक और शारीरिक अवस्था का लिंग के आधार पर मृत्यु दर में अंतर पर कई अध्ययन किए गए हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही मृत्यु दर के अंतर के सही कारणों का पता लगा सके। विभिन्न देशों की अलग संस्कृति, परपराएं, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आर्थिक-सामाजिक प्रभाव का पुरुषों और महिलाओं की मृत्यु दर पर असर होता है। इस अध्ययन में स्वास्थ्य नीतियों को भी लिंग और सामाजिक स्तर के आधार पर अंतर के लिए जिम्मेदार माना गया।
28 देशों के डेढ़ लाख से अधिक लोगों को अध्ययन में किया गया शामिल
28 देशों के 1,79,000 लोगों पर किए गए अध्ययन में 55 फीसदी महिलाएं शामिल थीं। अध्ययन में शामिल पुरुष और महिलाओं की उम्र 50 और उससे अधिक थी। यह अध्ययन विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों पर किया गया था। इसमें पाया गया कि 50 या उससे अधिक उम्र के पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले जल्दी मौत का खतरा करीब 60 फीसदी अधिक था। अध्ययन में यह भी पाया गया कि मृत्यु दर पर देश और सामाजिक परिस्थितियों का बड़ा प्रभाव पड़ता है।
जीवनशैली और परिवेश का होता है असर
अध्ययन में बताया गया है कि अलग-अलग देशों में महिला और पुरुष की मृत्यु दर के अनुपात में अंतर का कारण उनके बीच स्वास्थ्य को लेकर सजगता, उनकी जीवन शैली और परिवेश है। इसमें विभिन्न देशों में जीवन प्रत्याशा में अंतर का भी अध्ययन किया गया।