कनाडा की एक अदालत ने प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख और खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला को उसके प्रत्यर्पण के लिए भारत के दबाव के बीच जमानत दे दी। उसे 30 हजार डॉलर जमानत बॉन्ड भरने की शर्त पर जमानत दी गई। इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2025 में होनी है। हाल्टन में अज्ञात निशानेबाजों के हमले में घायल होने के बाद अक्तूबर में डल्ला को गिरफ्तार किया गया था। तब से भारत उसके प्रत्यर्पण के लिए कनाडा पर दबाव बना रहा है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय अधिकारियों की असहमति के कारण खालिस्तानी आतंकी को जमानत दे दी गई।
डल्ला 50 से अधिक मामलों में अपराधी घोषित
पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ओंटारियो की एक अदालत ने डल्ला के प्रत्यर्पण अनुरोध को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। मंत्रालय ने डल्ला को हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और आतंकवादी कृत्यों के 50 से अधिक मामलों में अपराधी घोषित किया है। उसे पिछले साल जनवरी में आतंकवादी घोषित किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दायर कई मामलों में भी वह अपराधी है।
आईएसआई के संपर्क में डल्ला
सूत्रों के अनुसार, डल्ला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में रहा है। भारत का मानना है कि जून 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद उसने खालिस्तानी संगठन की कमान संभाल ली है। पंजाब के मोगा जिले के मूल निवासी डल्ला को 28 अक्तूबर को ओंटारियों में गिरफ्तार किया गया था। वह अपने साथी गुरजंत सिंह के साथ कार में हाल्टन स गुजर रहा था, तभी वाहन में रखे हथियार से फायरिंग होने लगी। डल्ला के हाथ में गोली लगी, उसका साथी भी घायल हो गया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद अधिकारियों ने पुलिस को इसकी सूचना दी।
डल्ला के आवास से हथियार बरामद
जांच के दौरान, कनाडाई पुलिस ने उनके वाहन की तलाशी ली। एसयूवी पर गोलियों के निशान के साथ यात्री की सीट के फर्श पर गोलियों के दो खोल भी पाए गए। इसके एक दिन बाद डल्ला के आवास की भी तलाशी ली गई। इस दौरान भरी हुई मैगजीन के साथ एक टॉरस 9एमएम हैंडगन, राइफल, एक बन्दूक और मैगजीन बरामद की गईं। इसके बाद डल्ला और उसके साथी को गिरफ्तार किया गया। डल्ला पर अपने आतंकी नेटवर्क का विस्तार करने के लिए सोशल मीडिया के जरिए पंजाब और हरियाणा से युवाओं को भर्ती करने का आरोप लगाया गया है।
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