कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता टूटने के बाद कहा कि उन्होंने खराब व्यापार समझौते के कारण बातचीत से पीछे हटने का फैसला किया। उन्होंने अमेरिका के शुल्क का जवाब देने के लिए समान दर से जवाबी शुल्क लगाने की बात कही।
कार्नी ने दावा किया कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ऐसी नई शर्तें रखीं, जो आर्थिक रूप से नुकसानदेह और अनुचित थीं। उन्होंने कहा कि इन शर्तों से कनाडा को मिलने वाला कुल मुनाफा कम हो जाता। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर व्यापार युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया। कार्नी ने कहा, “जब आप पर हमला होता है तो आप युद्ध में होते हैं। हम पर हमला हुआ।”
व्यापार समझौते से कनाडा पर कैसे शिकंजा कसता अमेरिका?
कनाडाई पीएम ने कहा, “हम उनकी पेशकश को स्वीकार नहीं कर सकते और उन्होंने जो मांगा है, वह हम नहीं देंगे।” कार्नी ने कहा, “अमेरिका ने आखिरी घंटों में दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते करने की हमारी क्षमता को सीमित करने की कोशिश की। आपने मुझे कुछ देर पहले यह कहते हुए सुना कि हमने पिछले एक साल में क्या हासिल किया है- 20 नए समझौते, आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी और अपने बाजार तक पहुंच दोगुनी करने की संभावना। हम मुक्त व्यापार में विश्वास करते हैं।”
उन्होंने कहा, “दुनिया के कई देशों के लिए हम पसंदीदा साझेदार हैं और अमेरिका इसे सीमित करना चाहता था। उसने ऐसी भाषा का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत इसे सीमित किया जाना था। यह स्वीकार्य नहीं था।”
क्यों टूटा व्यापार समझौता?
कार्नी ने कहा, “इन शर्तों ने किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। संक्षेप में कहें तो उन्होंने बहुत ज्यादा मांगा और बहुत कम पेश किया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी मांगों के कुल प्रभाव ने सच्ची आर्थिक साझेदारी के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सीमा को दिखा दिया।” कार्नी ने कहा कि इसी वजह से उन्होंने शुक्रवार शाम अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता स्थगित कर दी और कनाडा के वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया।
शुक्रवार को वॉशिंगटन में दोनों पड़ोसी देशों के बीच बातचीत टूट गई। इसके बाद अमेरिका के 50 प्रतिशत नए शुल्क लागू होने का रास्ता साफ हो गया। ये शुल्क करीब 20 अरब डॉलर के सामान को प्रभावित करेंगे, जो अमेरिका को कनाडा के कुल निर्यात का करीब 5.5 प्रतिशत है।
ट्रंप ने कही थी क्या बात?
ट्रंप ने कहा था कि कार्नी के साथ उनके “अच्छे संबंध” हैं और इसी वजह से अमेरिका को कनाडा के साथ व्यापार समझौता करने में सक्षम होना चाहिए। हालांकि, कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि वॉशिंगटन की शर्तें आखिरकार स्वीकार करने योग्य नहीं थीं।
कार्नी ने अमेरिकी शुल्क के जवाब में “डॉलर के बदले डॉलर” के हिसाब से शुल्क लगाने का वादा किया। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कनाडा अमेरिकी नए शुल्क का जवाब डॉलर के बदले डॉलर के हिसाब से देगा, ताकि कनाडाई श्रमिकों, किसानों, परिवारों और कारोबारों की रक्षा की जा सके। हम यह कदम इस विश्वास के साथ उठा रहे हैं कि यह कनाडा के हित में है।”
8 सितंबर से लागू होंगे शुल्क
कनाडा के नए शुल्क खास तौर पर अमेरिकी स्टील और डेयरी उद्योगों को प्रभावित करेंगे। ये शुल्क 8 सितंबर से लागू होंगे। कार्नी ने कहा कि इसके बारे में विस्तृत जानकारी अगले सप्ताह दी जाएगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने शुक्रवार को कहा था कि वॉशिंगटन ने कनाडा से कुछ रियायतों के बदले स्टील, एल्युमीनियम, ऑटोमोबाइल और लकड़ी पर शुल्क में “महत्वपूर्ण कटौती” की पेशकश की थी।
कनाडा लंबे समय से ट्रंप के ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमीनियम पर लगाए गए शुल्क से राहत की मांग कर रहा है। इन शुल्कों से कनाडा की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, नौकरियों का नुकसान हुआ है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत व्यापारिक संबंधों पर दबाव पड़ा है। व्हाइट हाउस ने कनाडा द्वारा शुल्क लगाने के फैसले को अमेरिकी शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी उत्पादों के साथ “भेदभावपूर्ण व्यवहार” बताया था।