अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नीति और नियत साफ करते हुए कई सारे बड़े एलान किया। इसमें प्रमुख तौर पर कनाडा पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी भी शामिल है। इसी बीच ट्रंप की इस धमकी पर कनाडा की पूर्व वित्त मंत्री और कनाडा की प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में शामिल क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने प्रतिक्रिया देते हुए एक योजना बनाने का जिक्र किया है।
क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने ट्रंप की धमकी का जवाब देने के लिए प्रतिशोध सूची जारी करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कनाडा को उन उत्पादों की सूची तैयार करनी चाहिए, जिन्हें टार्गेट किया जाएगा, ताकि अमेरिकी व्यापारियों को इसका असर समझ में आए।
फ्रीलैंड ने बताया प्रतिशोध सूची का उद्देश्य
फ्रीलैंड ने बताया कि इस सूची में 200 बिलियन कनाडाई डॉलर (139 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के उत्पाद शामिल होंगे। इसका उद्देश्य ये बताना होगा कि ट्रंप की नीतियों से अमेरिकी व्यपारियों को कितना नुकसान होने वाला है। साथ ही फ्रीलैंड ने कहा कि कनाडा को अमेरिका की धमकी का जवाब सटीक और प्रभावी तरीके से देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसके लिए अमेरिका के कुछ राज्यों, जैसे फ्लोरिडा, विस्कॉन्सिन और मिशिगन के उत्पादकों को टार्गेट कर कनाडा को अपने जवाबी कदमों से अमेरिका नुकसान पहुंचाना चाहिए। उदाहरण के लिए, फ्लोरिडा के संतरे, विस्कॉन्सिन के डेयरी उत्पाद और मिशिगन के डिशवॉशर निर्माता कनाडा की इस योजनाओं का हिस्सा हो सकते हैं।
फ्रीलैंड ने बताया अपना प्लान
साथ ही फ्रीलैंड ने यह भी कहा कि अगर वह कनाडा की प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह अमेरिकी कंपनियों को कनाडा की संघीय खरीद पर बोली लगाने से रोकने की योजना बनाएंगी। इसके अलावा वह अन्य देशों के नेताओं के साथ एक अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने की सोच रही हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर इस तरह के मुद्दों का मिलकर समाधान किया जा सके।
ट्रंप की धमकी कनाडा के लिए संकट, समझिए कैसे
बता दें कि कनाडा की पूर्व वित्त मंत्री और पीएम की दौड़ में शामिल क्रिस्टिया फ्रीलैंड का ये बयान अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के जवाब में आया है। जहां ट्रंप ने कनाडा को दबाव में लाने के लिए अपने व्यापारिक नीतियों का इस्तेमाल करने की धमकी दी है। देखा जाए तो ट्रंप की ये धमकी इस स्थिति ने कनाडा के लिए एक बड़ा व्यपारिक मुद्दा पैदा कर दिया है, क्योंकि इन व्यापारिक नीतियों से कनाडा की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।