विभिन्न मामलों पर चीन की दादागिरी को देखते हुए विश्व के तीन देशों ने अलग अलग तरीकों से कड़ा रुख दर्शाया है। कनाडा के सांसदों ने चीन को अपने देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया, तो वहीं फिलीपींस ने उसकी जल सीमा में चीनी जहाजों को रोकने पर राजदूत को तलब किया। ताइवान ने जहाज निर्माण कार्यक्रम के जरिये चीन के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमता में इजाफा किया।
कनाडा : सांसदों ने माना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन
यहां के सांसदों की राष्ट्रीय सुरक्षा व खुफिया समिति ने सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें चीन को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया। रिपोर्ट केअनुसार कई देश कनाडा के विज्ञान व तकनीक पर हमला कर रहे हैं, यह लंबे समय में उसके आर्थिक व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों को नुकसान पहुंचा सकता है।
आरोप लगाया कि चीन, रूस और ईरान ने उसके कोविड-19 टीके से जुड़े शोध पर चुराने के प्रयास किए, जबकि कनाडा में कोई भी टीका तीसरे चरण के ट्रायल में भी नहीं पहुंचा है।
चीन को लेकर विशेष रूप से कहा गया कि वह 2008 से ‘टैलेंट प्रोग्राम’ के जरिए कनाडा के विज्ञान व तकनीक को चीनी वैज्ञानिकों के जरिये हासिल कर रहा है। ऐसे ही मामले में अमेरिका का न्याय विभाग भी उसकी जांच करवा रहा है।
फिलीपींस : विटसन रीफ पर रुके अपने जहाज हटाए चीन
यहां सरकार ने सोमवार को चीनी राजदूत हुआन शिलियन को बुलाकर उसकी जल सीमा में आने वाली दक्षिण चीन सागर स्थित एक मूंगा चट्टान विटसन-रीफ पर चीनी जहाज रोकने का विरोध किया। इन्हें तुरंत वहां से हटाने को कहा है।
सरकार ने कहा कि चीनी जहाजों की मौजूदगी तनाव बढ़ा रही है। विटसन रीफ पर पिछले महीने करीब 200 चीनी जहाज देखे गए थे। इनमें से 40 अब भी वहां मौजूद हैं। चीन का कहना है कि यह क्षेत्र उसके अधीन आता है और उसके जहाज अपने क्षेत्र में ही खड़े हैं।
फिलीपींस के विदेश विभाग ने कहा कि चीन की मौजूदगी अवैध है और इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है। फिलीपींस के राज्य पालावन से करीब 324 किमी पश्चिम में मौजूद इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत उसका माना जाता है। यहां मछली पकड़ने, तेल-गैस व अन्य संसाधनों की खोज पर उनका एकाधिकार है।
विशेषज्ञों केअनुसार चीन लगातार क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ा रहा है, उसने करीब सात विवादित द्वीपों पर मिसाइलें तैनात करके क्षेत्र में तनाव को नये स्तर पर ले जाने का काम किया है।
ताइवान : 10 हजार टन का जल-थल में उपयोगी जहाज किया लॉन्च
ताइवान ने मंगलवार को जल और थल परिवहन का विशेष जहाज लॉन्च किया। यह उसके नये जहाज निर्माण कार्यक्रम के तहत बनाया गया पहला जहाज है। यह कार्यक्रम चीन द्वारा क्षेत्र में सैन्य ताकत की धौंस दिखाने और ताइवान को अपना भूभाग बताने की नीति के खिलाफ शुरू किया गया था। जहाज के उदघाटन के मौके पर राष्ट्रपति साई इंग वेन भी मौजूद थीं।
उन्हाेंने कहा कि 10 हजार टन का यह नया जहाज ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को देखते हुए तैयार किया गया है। ताइवान अपने प्राट्स द्वीप पर जहाज व पंडुप्पियों सहित घरेलू सैन्य उद्योग विकसित कर रहा है। इस द्वीप को भी चीन अपना बताता है।
ताइवान के रक्षा सचिव ने बताया कि सोमवार को चीन ने दक्षिण ताइवान के वायुक्षेत्र में 25 युद्ध विमान भेज कर ताइवान पर कब्जे के लिए धमकाने का पैटर्न जारी रखा है। उसने हाल में नौसेना का युद्धाभ्यास भी दक्षिण चीन सागर में किया था।